Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

स्थायी भाबाबिष्ट चित्त पाइया बिभाब बित्त

स्थायी भाबाबिष्ट चित्त पाइया बिभाब-बित्त उद्भट भाबेते आपनार प्राण-बृत्ते न्यस कोरे प्राण सेइ न्यास-भोरे देह प्रति बिकृति चालाय
अर्थ

जब स्थायी भाव हृदय में प्रवेश करता है, तो हृदय को विभाव का महान् धन प्राप्त होता है। यह असाधारण भाव प्राण-वायु को प्रभावित करता है, जिससे शरीर पर भाव के लक्षण प्रकट होने लगते हैं।

बैबर्ण्य रोमञ्च स्वेद स्तम्भ कम्प स्वर-भेद प्रलयाश्रु ए अष्ट बिकार सञ्चारी जे भाबचोय हर्षामार्ष आर भोय बिषाद बिस्मोयादि तार
अर्थ

स्थायी भाव के आठ सात्त्विक लक्षण हैं: स्तब्ध होना, पसीना आना, रोमांच होना, स्वर का रुँधना, शरीर का काँपना, रंग बदलना, आँसू बहना और प्रलय (मूर्च्छा)। संचारी भावों में हर्ष, अमर्ष, भय, विषाद, विस्मय आदि आते हैं।

प्रबृत्ति कारण होय लीला-काले रसे लोय आपने कोरय अनुखण धूमयिता उज्ज्वलिता दीप्ता आर सु-उद्दीप्ता एइ चारि अबस्थालखण
अर्थ

लीला की क्रिया, रस और समय के अनुसार ये भाव-लक्षण हर क्षण चार अवस्थाओं में प्रकट होते हैं: धूमायित, उज्ज्वलित, दीप्त और सुदीप्त।

जार जेइ अधिकार सात्त्विक बिकार तार से लखणे होय तो' उदोय महा-भाब दशा जथा सु-उद्दीप्ता भाब तथा अनायासे सु-लखिता होय
अर्थ

जो साधक जिस स्तर का अधिकारी होता है, उसमें उसी अनुसार सात्त्विक भाव के लक्षण प्रकट होते हैं। सुदीप्त भाव के लक्षण तभी सहज ही स्पष्ट दिखाई देते हैं, जब महाभाव की अवस्था प्रकट होती है।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
4