Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

चैतन्य चन्द्रेर लीला समुद्र अपार

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चैतन्य-चन्द्रेर लीला समुद्र अपार बुझिते शकति नाहि एइ कथा सार
अर्थ

चैतन्यचंद्र की लीलाएँ एक अपार सागर हैं। उन्हें समझने की शक्ति किसी में नहीं, यही इस कथा का सार है।

शास्त्रेर अगम्य तत्त्व श्री-कृष्ण आमार ताँर लीला अन्त बुझे शकति काहार
अर्थ

मेरे श्रीकृष्ण वह तत्त्व हैं जिन तक शास्त्र भी नहीं पहुँच सकते। उनकी लीलाओं का अंत जानने की शक्ति किसमें है?

तबे मूर्ख-जन केनो शास्त्र बिचारिया गौर-लीला नाहि माने अन्त ना पाइया
अर्थ

तो फिर मूर्ख लोग शास्त्रों का विचार करके, उनमें इसका अंत न पाकर, गौर-लीला को क्यों नहीं मानते?

अनन्तेर अन्त आछे कोन शास्त्र गाय शास्त्राधीन कृष्ण इह शुनि' हासि पाय
अर्थ

अनंत का भी कोई अंत होता है, ऐसा कौन-सा शास्त्र कहता है? 'कृष्ण शास्त्र के अधीन हैं' यह सुनकर मुझे हँसी आती है।

कृष्ण होइबेन गोरा इच्छ हो'लो ताँर स-बैकुण्ठ नबद्वीपे होइल अबतार
अर्थ

कृष्ण अपनी ही इच्छा से गौर रूप में प्रकट हुए। अपने संपूर्ण वैकुंठ-धाम को साथ लेकर वे नवद्वीप में अवतरित हुए।

जखोन आसेन कृष्ण जीब उद्धारिते सङ्गे सब सहचर आसे पृथिवीते
अर्थ

जब कृष्ण जीवों के उद्धार के लिए आते हैं, तब वे अपने सभी सहचरों के साथ पृथ्वी पर आते हैं।

गोरा अबतारे ताँर श्री-जय-बिजोय नबद्वीपे शत्रु-भाबे होइलो उदोय
अर्थ

गौर-अवतार में उनके श्री जय और विजय नवद्वीप में शत्रु-भाव से प्रकट हुए।

पूर्बे पूर्बे अबतारे असुर आछिलो शास्त्रे बोले पण्डित होइया जनमिलो
अर्थ

पूर्व अवतारों में वे असुर थे, अब वे शास्त्रों के पंडित बनकर जन्मे।

स्मृति-तर्क-शास्त्रे बोले बैरी प्रकाशिया गोराचन्द्र सह रण कोरिलो मातिया
अर्थ

स्मृति और तर्क-शास्त्रों की दुहाई देकर वे शत्रु बनकर प्रकट हुए और गौरचंद्र से युद्ध करने में तत्पर हो गए।

अत एब नबद्वीप-बासी जत जन श्री-चैतन्य-लीला-पुष्टि कोरे अनुखण
अर्थ

इस प्रकार नवद्वीप के सभी निवासी क्षण-क्षण में श्री चैतन्य की लीला को और अधिक मधुर बनाते हैं।

एखोन जे ब्रह्म-कुले चैतन्येर अरि ता'के जानि चैतन्येर लीला पुष्टिकारी
अर्थ

जो अब ब्राह्मण-कुल में जन्मे चैतन्य के शत्रु हैं, उन्हें भी मैं चैतन्य की लीला को समृद्ध करने वाला ही मानता हूँ।

श्री-चैतन्य-अनुचर शत्रु-मित्र जत सकलेर श्री-चरणे होइलाम नत
अर्थ

चाहे शत्रु हों या मित्र, श्री चैतन्य के सभी अनुचरों के श्रीचरणों में मैं नमन करता हूँ।

तोमार कोरोहो कृपा ए दासेर प्रति चैतन्य सु-दृढ कोरो बिनोदेर मति
अर्थ

इस दास पर आप कृपा करें। भक्तिविनोद के मन को श्री चैतन्य के प्रति सुदृढ़ बना दें।