चिन्तामणि मोय राधा कुण्ड तट
चिन्तामणि से बने राधा-कुण्ड के तट पर सैकड़ों-सैकड़ों कुञ्ज हैं, जहाँ मूँगे के वृक्ष और लताएँ मोतियों के भार से झुकी हुई हैं।
उस सुन्दर स्वानन्द-सुखद-कुञ्ज की एक सुन्दर कुटिया में बैठकर मैं श्रीकृष्ण के पवित्र नामों का कीर्तन करूँगी। मैं सदा श्रीकृष्ण की सेवा की लालसा रखूँगी।
फिर श्रीकृष्ण की मुरली का स्वर इस दासी के कानों में प्रवेश करेगा। उस बाँसुरी की धुन सुनकर मैं सब कुछ भूल जाऊँगी और आनन्द में उन्मत्त हो जाऊँगी।
"राधे! राधे!" पुकारते हुए मुरली मेरी स्वामिनी का नाम लेगी। अपनी स्वामिनी का नाम सुनकर यह दासी चौंककर उठ बैठेगी। तब उसके प्राणों का क्या होगा?