Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोलोक छाडिय प्रभु केन बा अबनी

गोलोक छाडिय प्रभु केन बा अबनी काल-रूप केन हैल गोरा-बरण-खनि
अर्थ

परमेश्वर ने गोलोक को क्यों छोड़ा? उन्होंने अपना श्याम रूप बदलकर गौर वर्ण का रूप क्यों धारण कर लिया?

हास बिलास छाडि केन पहुं कान्दे ना जानि ठेकिल गोरा कार प्रेम-फान्दे
अर्थ

हँसी और विनोद की अपनी लीलाओं को छोड़कर प्रभु अब रो क्यों रहे हैं? मैं नहीं जानता। भगवान गौर ने किसके लिए और क्यों अपना भावमय दिव्य प्रेम का जाल बिछाया?

क्षणे कृष्ण कृष्ण बलि कान्दे घन-घन खणे सखी सखी बलि करये रोदन
अर्थ

एक क्षण वे “कृष्ण! कृष्ण!” पुकारकर रोते हैं। अगले ही क्षण वे “सखी! सखी!” पुकारते हैं।

मथुरा मथुरा बलि करये बिलाप क्षणे बा अक्रूर बलि करे अनुताप
अर्थ

एक क्षण वे “मथुरा! मथुरा!” पुकारते हैं। दूसरे क्षण वे “अक्रूर!” पुकारते हैं। वे व्याकुल हैं।

क्षणे क्षणे बले छिये चान्द चन्दन धूलाय लोटाये कान्दे यत निज-जन
अर्थ

क्षण-क्षण वे पुकारते हैं, “अभागे चाँद! अभागे चन्दन!” वे धूल में लोटते हैं। अपने साथियों से घिरे हुए वे रोते हैं।

छार पराण कुलबतीर ना याय कहिते आकुल पहुं धूलाय लोटाय
अर्थ

“जलकर राख हो जाने पर भी साध्वी गोपियाँ अपने प्राण नहीं छोड़तीं!” वे कहते हैं। व्याकुल होकर वे भूमि पर लोटते हैं।

गदाधर कान्दे प्राण-नाथ लैया कोले राय रामानन्द कान्दे प्रणय बिकले
अर्थ

गदाधर रोते हैं। वे अपने प्राणनाथ को गले लगाते हैं। रामानन्द राय रोते हैं। भावमय दिव्य प्रेम के झकोरों से वे इधर-उधर डोलते हैं।

स्वरूप श्री-रूप कान्दे सोँअरि बिलास ना बुझिया कान्दे नयनानन्द दास
अर्थ

स्वरूप दामोदर और रूप गोस्वामी भी रोते हैं। इन लीलाओं का स्मरण करते हुए, पर उनमें से कुछ भी न समझते हुए, नयनानन्द दास भी रोते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
8