Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जय रे जय रे गोरा श्री शची नन्दन

जय रे जय रे गोरा श्री-शची-नन्दन मङ्गल नटन सुठान रे कीर्तन आनन्दे श्रीबास रामानन्दे मुकुन्द बासु गुण गान रे
अर्थ

शची के पुत्र गौर की जय हो, जय हो, जो मंगलमय नृत्य के धाम हैं! कीर्तन के आनन्द में श्रीवास, रामानन्द, मुकुन्द और वासुदेव घोष उनके गुण गाते हैं।

द्रां द्रां द्रिमि द्रिमि मादल बाजत मधुर मदिरा रसाल रे शङ्ख करताल घण्टा-बर भाल मलिन पद-तल ताल रे
अर्थ

“द्रां द्रां द्रिमि द्रिमि!” ढोल यही बोल बोलते हैं। मधुर और अमृतमय मंजीरे झनकते हैं। शंख, करताल और घण्टे मधुर ध्वनि करते हैं। नाचने वालों के पैरों की थाप ताल देती है।

को-इ दे-इ अङ्गे सुगन्धि चन्दन को-इ दे-इ मालती-माल रे पिरीति फुल-शरे मरम भेदल भाबे सहचर भोर रे
अर्थ

कोई भगवान गौर के अंगों पर सुगन्धित चन्दन का लेप लगाता है। कोई उन्हें चमेली की माला अर्पित करता है। भक्त भावमय प्रेम से विभोर हैं, भगवान गौर के प्रति प्रेम के पुष्प-बाणों से उनके हृदय बिंध गए हैं।

केह बोले गोर जानकी-बल्लभ राधार प्रिय पाञ्चबाण रे नयनानन्देर मने आन नाहि जाने आमार गदाधरेर प्राण रे
अर्थ

कुछ लोग कहते हैं कि भगवान गौर जानकी के प्रिय राम हैं और राधा के प्रिय कृष्ण हैं, जो कामदेव के समान सुन्दर हैं। नयनानन्द के हृदय में यह विचार उठता है कि भगवान गौर मेरे गदाधर के प्राण हैं। इससे अधिक मैं कुछ नहीं जानता।

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पद
4

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