Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मुख खानि पुर्णिमार शशी किबा मन्त्र जपे

मुख-खानि पुर्णिमार शशी किबा मन्त्र जपे बिम्ब बिडम्बित अधर सदा-इ केन काम्पे
अर्थ

उनके मुख का पूर्ण चन्द्र महामन्त्र का जप करता है। उनके अधर, जो बिम्ब फलों की हँसी उड़ाते हैं, सदा क्यों काँपते रहते हैं?

टेक
गोरा नाचे नटन रङ्गिया अखिल जीबेर मन बान्धे प्रेम दिया
अर्थ

भगवान गौर मनोहर ढंग से नाचते हैं। वे हर जीव के हृदय में भावमय दिव्य प्रेम का उपहार रख देते हैं।

चान्द कन्दये मुख छान्द देखिया तपन कान्दे आङ्खि जलद हेरिया
अर्थ

भगवान गौर के मुख-चन्द्र को रोते हुए देखकर हर व्यक्ति की आँखें वर्षा ऋतु के उन बादलों जैसी हो गई हैं, जो आँसुओं की वर्षा कर रहे हैं।

काञ्चा काञ्चन जिनि नब रसेर गोरा बुक बाहि पडे प्रेम परशेर धारा
अर्थ

नए अमृत-रस से मधुर भगवान गौर नए सोने को भी मात देते हैं। उनकी छाती पर भावमय प्रेम के आँसुओं की बाढ़ बहती है।

कहये नयनानन्द मनेर उल्लासे पुनः कि देखिब गोरा गदाधर पशे
अर्थ

नयनानन्द कहते हैं, क्या मैं हर्षित हृदय से भगवान गौर को फिर गदाधर के पास देख पाऊँगा?

इस भजन के बारे में

पद
5