कलि घोर तिमिरे गरासल जग जन
कलियुग के भयंकर अन्धकार ने संसार के लोगों को निगल लिया। धर्म और पुण्य कर्म दूर भाग गए। ऐसी स्थिति में अत्यन्त दयालु भगवान गौर चिन्तामणि रत्न ले आए।
मेरे भाइयो! अरे मेरे भाइयो! भगवान गौर के सब गुणों का वर्णन करने की शक्ति किसी में नहीं है। कितने ही गणेश और कितने ही ब्रह्मा उनका वर्णन करने का प्रयास करें, तो भी उनमें उनकी सारी महिमा का वर्णन करने की शक्ति नहीं है।
जो मनुष्य चारों वेद और छह दर्शनशास्त्र पढ़ लेता है, पर भगवान गौरांग का भजन नहीं करता, उसकी विद्या किस काम की? वह बिना आँखों वाले मनुष्य के समान है। वह उस अन्धे के समान है जो दर्पण में अपने को देखने का प्रयास कर रहा हो। उसका सारा अध्ययन किस काम का?
जो व्यक्ति यह नहीं जानता कि भगवान गौरांग ही परम हैं, वह वेदों और दर्शनशास्त्र के विषय में कुछ भी नहीं जानता। नयनानन्द कहते हैं, जो व्यक्ति यह जानता है कि भगवान गौरांग ही परम हैं, वह सब कुछ जानता है। सारी योग-सिद्धियाँ उसकी हथेली पर रहती हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नयनानन्द दास
- पद
- 4