Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोरा मोर गुणेर सागर

गोरा मोर गुणेर सागर प्रेमेर तरन्ँअ ताय उठे निरन्तर
अर्थ

मेरे प्रभु गौर आध्यात्मिक गुणों के सागर हैं, ऐसा सागर जिसमें भावमय दिव्य प्रेम की तरंगें सदा उठती रहती हैं।

गोरा मोर अकलङ्क शशी हरि-नाम-सुधा ताहे क्षरे दिबा-निशि
अर्थ

मेरे प्रभु गौर निष्कलंक चन्द्रमा हैं, ऐसा चन्द्रमा जिससे भगवान कृष्ण के पवित्र नामों का अमृत दिन-रात झरता रहता है।

गोरा मोर हिमाद्रि-शेखर ताहा हैते प्रेम-गङ्गा बहे निरन्तर
अर्थ

मेरे प्रभु गौर हिमालय की पर्वत-चोटी हैं, ऐसी चोटी जिससे भावमय दिव्य प्रेम की गंगा सदा बहती रहती है।

गोरा मोर प्रेम कल्प-तरु याँर पद-छाये जीब सुखे बास करु
अर्थ

मेरे प्रभु गौर भावमय दिव्य प्रेम के कल्पवृक्ष हैं, ऐसा वृक्ष जिसकी छाया जीवात्माओं को आनन्दमय निवास देती है।

गोरा मोर नब-जलधर बरषि शीतल याहे करे नारी-नर
अर्थ

मेरे प्रभु गौर एक नया वर्षा-मेघ हैं, ऐसा मेघ जो सभी पुरुषों और स्त्रियों पर शीतल वर्षा बरसाता है।

गोरा मोर आनन्देर खनि नयनानन्देर प्राण याहार निछनि
अर्थ

मेरे प्रभु गौर आध्यात्मिक आनन्द के रत्नों से भरी खान हैं। वे नयनानन्द के प्राणों को पवित्र करते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
6