हेनो काले कबे बिलास मञ्जरी
मुझे इस दशा में देखकर विलास-मंजरी और अनंग-मंजरी कब मुझ पर अपार कृपा करके ये सर्वोत्तम वचन कहेंगी?
"सखी, आओ, हमारे साथ आओ। हम जानती हैं कि तुम ललिता के दल की हो। घर-गृहस्थी की बातें और धर्म-लाज का भय छोड़कर आओ, राधा-कृष्ण की भक्ति करो।"
यह मधुर वचन सुनकर मैं इन दोनों मंजरियों के चरणों की शरण लूँगी। तब वे दोनों कृपापूर्वक मुझे ललिता के पास ले जाएँगी।
तब सुन्दरी ललिता कृपा करके मुझे अपनी दासी बना लेंगी। मेरी सेवा की लालसा जानकर वे मुझे अपने ही कुञ्ज की कुटिया में निवास देंगी।