Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जौवने जखोन, धन उपार्जने

जौवने जखोन, धन-उपार्जने, होइनु विपुल कामी धरम स्मरिया, गृहिनीर कर, धोरिनु तखोन आमि
अर्थ

युवावस्था में जब मैं धन कमाने में लगा, तो मुझमें धन की तीव्र लालसा जाग उठी। तब धर्म का स्मरण करके मैंने एक पत्नी का हाथ थाम लिया।

संसार पाता’ये, ताहार सहित, काल-खोय् कोइनु कोतो बहु सुत-सुता, जनम लोभिलो, मरमे होइनु हतो
अर्थ

उसके साथ गृहस्थी बसाकर मैंने बहुत सा समय व्यर्थ खो दिया। हमारे कई पुत्र-पुत्रियाँ हुईं, और मेरा हृदय भीतर से टूटता चला गया।

संसारेर भार, बाडे दिने दिने, अचल होइलो गति बार्धक्य आसिया, घेरिलो आमारे, अस्थिर होइलो मति
अर्थ

गृहस्थी का भार दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया, और जीवन के लक्ष्य की ओर मेरी प्रगति रुक गई। बुढ़ापे ने आकर मुझे घेर लिया, और मेरा मन अस्थिर हो उठा।

पीडाय अस्थिर, चिन्ताय ज्वरित, अभावे ज्वलित चित उपाय ना देखि, अन्धकार-मोय, एखोन हो’येछि भीत
अर्थ

रोग से बेचैन, चिन्ता से ज्वरग्रस्त, मेरा हृदय अभावों में जल रहा है। इस अन्धकार से निकलने का कोई उपाय मुझे नहीं दिखता, और अब मैं भयभीत हो गया हूँ।

संसार-तटनी- स्रोत नहे शेष, मरण निकटे घोर सब समापिया, भोजिबो तोमाय, ए आशा बिफल मोर
अर्थ

संसार-रूपी नदी की धारा का कोई अन्त नहीं है, और मृत्यु सदा भयंकर रूप में निकट खड़ी है। मैंने सोचा था, 'यह सब पूरा करके फिर आपकी सेवा करूँगा', परन्तु मेरी यह आशा भी व्यर्थ सिद्ध हुई।

एबे शुनो प्रभु! आमि गति-हीन, भकतिविनोद कोय तव कृपा बिना, सकलि निराशा, देहो’ मोरे पदाश्रोय
अर्थ

भक्तिविनोद कहते हैं: 'अब सुनिए, प्रभु! मैं सर्वथा असहाय हूँ। आपकी कृपा के बिना सब कुछ निराशा ही है। मुझे अपने चरणों की शरण दे दीजिए।'

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
शरणागति
पद
6