Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जय जय कल रब नदीया नगरे

जय जय कल-रब नदीया नगरे जनम लभिया गोरा शचीर उदरे
अर्थ

जब नदिया के नगरों में “जय! जय!” की मधुर ध्वनियाँ गूँज उठीं, तब भगवान गौर ने शची के गर्भ से जन्म लिया।

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि नक्षत्र फाल्गुनी शुभ-क्षणे जनमिला गोरा द्विज-मणि
अर्थ

वह दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि थी। नक्षत्र फाल्गुनी था। उस शुभ क्षण में द्विजों के मणि भगवान गौर ने जन्म लिया।

पूर्णिमार चन्द्र जिनि किरण प्रकाश दूरे गेल अन्धकार पा-इया निराश
अर्थ

जब भगवान गौर के तेज ने पूर्णिमा के चन्द्रमा को हरा दिया, तब अन्धा कर देने वाला घना अन्धकार सारी आशा छोड़ बैठा। गहरी निराशा में वह दूर भाग गया।

द्वापरे नन्देर घरे कृष्ण अबतार यशोदा उदरे जन्म बिदित संसार
अर्थ

द्वापर युग में भगवान कृष्ण राजा नन्द के घर में अवतरित हुए। संसार के लोगों ने समझा कि कृष्ण ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया है।

शचीर उदरे एबे जन्म नदीयाते कलि-युगेर जीब सब निस्तार करिते
अर्थ

उसी तरह कलियुग के पतित जीवों का उद्धार करने के लिए भगवान गौर ने नदिया में शची के गर्भ से जन्म लिया।

बासुदेब घोष कहे मने करि आश गौर-पद-द्वन्द्व हृदे करिया भरसा
अर्थ

वासुदेव घोष कहते हैं: मैं अपने हृदय में आशा रखता हूँ। अपने हृदय में मैं भगवान गौर के चरणों का आश्रय लेता हूँ।

इस भजन के बारे में

राग
तुड़ी राग या करुणा राग
पद
6