नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
जय जय श्रि कृष्ण चैतन्य नाम
जय जय श्रि-कृष्ण-चैतन्य नाम
कलि-मद-मथन नित्यानन्द धाम
अपरूप हेम कलप-तरु जोर
प्रेम-रतन फल धरल उजोर
अयाचित वितर-इ काहे ना उपेखि
ऐछन सदय-हृदय नाहि देखि
ये नाचिते नाचये बधिर जद अन्ध
कान्दिते अखिल भुबन-जन कान्द
तेंहि अनुमानिये दुहुं परमेश
प्रति दरपणे जनु रबिर आबेश
इह रसे याहार नाहिक बिशोयास
मलिने मुकुरे नाहि बिम्ब बिकाश
गोबिन्द दासिया कहे ताहे कि बिचार
कोटी कलप तार नाहिक बिस्तार