Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कबे मोर मूढ मन छारि' अन्य ध्यान

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कबे मोर मूढ मन छारि' अन्य ध्यान श्री-कृष्ण-चरणे पाबे बिश्रामेर स्थान
अर्थ

मेरा यह मूढ़ मन कब अन्य सब चिंतन त्यागकर श्रीकृष्ण के चरणों में विश्राम का स्थान पाएगा?

कबे आमि जानिबो आपने अकिञ्चन आमार अपेख खुद्र नाहि अन्य जन
अर्थ

कब मैं यह जानूँगा कि मेरे पास अपना कुछ भी नहीं है, और मुझसे तुच्छ इस संसार में कोई और नहीं है?

कबे आमि आ-चण्डाले कोरिबो प्रणति कृष्ण-भक्ति मागि' ल'ब कोरिया मिनति
अर्थ

कब मैं चाण्डाल तक सभी को प्रणाम करूँगा, और विनती करते हुए उनसे कृष्ण-भक्ति की भिक्षा माँगूँगा?

सर्ब-जीबे दोया मोर कोत दिने हबे जीबेर दुर्गति देखि' लोतक पोडिबे
अर्थ

कितने दिनों बाद मेरे मन में सब जीवों के लिए दया जागेगी? जीवों की दुर्गति देखकर कब मेरी आँखों से आँसू बहेंगे?

कान्दिते कान्दिते आमि ज'बो बृन्दाबन ब्रज-धामे बैष्णबेर लोइबो शरण
अर्थ

रोते-रोते मैं कब वृन्दावन जाऊँगा? कब व्रज-धाम में वैष्णवों की शरण लूँगा?

ब्रज-बासी-सन्निधाने जुरि' दुइ कोर जिज्ञासिबो लीला-स्थान होइया कतोर
अर्थ

व्रजवासियों के समीप दोनों हाथ जोड़कर, अत्यंत आग्रह से, कब मैं लीला-स्थलों के विषय में पूछूँगा?

ओहे ब्रज-बासी मोरे अनुग्रह कोरि' देखाओ कोथाय लीला कोरिलेन होरि
अर्थ

कब मैं कहूँगा, 'हे व्रजवासियों, मुझ पर कृपा करके दिखाओ कि हरि ने यहाँ कहाँ-कहाँ लीला की थी'?

तबे कोन ब्रज-जन स-कृपा-अन्तोरे आमारे जा'बेन लो'ये बिपिन-भितोरे
अर्थ

फिर कब कोई कृपालु व्रजवासी मुझे साथ लेकर वन में ले जाएगा?

बोलिबेन देखो एइ कदम्ब-कानन जथा रास-लीला कोइल ब्रजेन्द्र-नन्दन
अर्थ

वह कहेगा, 'देखो, यह वही कदंब वन है, जहाँ व्रजेन्द्र-नन्दन ने रास-लीला की थी...'

ऐ देखो नन्द-ग्राम नन्देर आबास ऐ देखो बलदेब जथा कोइलो रास
अर्थ

'...यह देखो, नन्द-ग्राम है, यह नन्द का घर है। यह देखो, यहाँ बलदेव ने रास किया था...'

ऐ देखो जथा होइलो दुकूल-हरण ऐ स्थाने बकासुर होइलो निधन
अर्थ

'...यह देखो, यहीं वस्त्र-हरण हुआ था, और यहीं बकासुर का वध हुआ था।'

एइ-रूपे ब्रज-जन-सह बृन्दाबने देखिबो लीलार स्थान स-तृष्ण-नयने
अर्थ

इस प्रकार उस व्रजवासी के साथ वृन्दावन में कब मैं प्यासी आँखों से लीला-स्थलों को देखूँगा?

कभु बा जमुना-तिरे शुनि' बंशी-ध्वनि आबास होइया लाभ कोरिबो धरणी
अर्थ

कब यमुना के तट पर बाँसुरी की ध्वनि सुनकर मैं आनन्द से बेसुध होकर धरती पर गिर पड़ूँगा?

कृपामोय ब्रज-जन कृष्ण कृष्ण बोलि' पान कोराइबे जल पूरिया अञ्जलि
अर्थ

कब कोई दयामय व्रजवासी 'कृष्ण! कृष्ण!' कहते हुए अपनी अंजलि भर जल मुझे पिलाएगा?

हरि-नाम शुने पुनः पाइया चेतन ब्रज-जन-सह आमि कोरिबो भ्रमण
अर्थ

हरि-नाम सुनकर पुनः चेतना पाकर, कब मैं उस व्रजवासी के साथ फिर विचरण करूँगा?

कबे हेनो शुभ-दिन होइबे आमार माधुकोरी कोरि' बेदैबो द्वार द्वार
अर्थ

कब मेरा ऐसा शुभ दिन आएगा, जब मैं द्वार-द्वार जाकर माधुकरी भिक्षा माँगूँगा?

जमुना-सलीला पिबो अञ्जलि भरिया देब-द्वारे रात्रि-काले रोहिबो शुइया
अर्थ

यमुना का जल अंजलि भरकर कब पीऊँगा? रात्रि में किसी मंदिर के द्वार पर कब सोया रहूँगा?

जखोन आसिबे कल ए भौतिक पुर जल-जन्तु-महोत्सब होइबे प्रचुर
अर्थ

जब इस भौतिक शरीर का अंत आएगा, और यह जल के जीवों के लिए बड़ा भोज बन जाएगा,...

सिद्ध-देहे निज-कुञ्जे सखीर चरणे नित्य-काल थाकिया सेबिबो कृष्ण-धने
अर्थ

...तब कब मैं अपनी सिद्ध-देह में, अपने कुंज में सखी के चरणों के पास सदा रहकर कृष्ण-धन की सेवा करूँगा?

एइ से प्रार्थना कोरे' ए पामोर छार श्री-जाह्नबा मोरे दोया कोरो' एइ बार
अर्थ

यह पापी, यह राख का ढेर, यही प्रार्थना करता है: 'हे श्री जाह्नवा देवी, इस बार मुझ पर कृपा कीजिए।'