Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
गुरुदेव्! कबे मोर सेइ दिन् ह’बे मन स्थिर कोरि’, निर्जने बोसिया, कृष्ण-नाम गा’बो जबे संसार-फुकार, काने ना पोषिबे, देहो-रोग दूरे रो’बे
अर्थ

हे गुरुदेव! कब वह दिन मेरा होगा, जब मैं मन को स्थिर करके, किसी एकांत स्थान में बैठकर कृष्ण का नाम गाऊँगा? तब संसार का कोलाहल मेरे कानों में प्रवेश नहीं करेगा, और देहात्मबुद्धि का रोग मुझसे दूर रहेगा।

`हरे कृष्ण’ बोलि’, गाहिते गाहिते, नयने बोहिबे लोर देहेते पुलक, उदित होइबे, प्रेमेते कोरिबे भोर
अर्थ

निरंतर गाते-गाते मैं 'हरे कृष्ण' पुकारूँगा, मेरे नेत्रों से अश्रु बहेंगे, मेरे शरीर में रोमांच होगा, और मैं प्रेम से अभिभूत हो जाऊँगा।

गद-गद वानी, मुखे बाहिरिबे, काँपिबे शरीर मम घर्म मुहुर् मुहुः, विर्वर्न होइबे, स्तम्भित प्रलय सम
अर्थ

मेरे मुख से गद्गद वाणी निकलेगी, मेरा शरीर काँपेगा, बार-बार स्वेद से भीगेगा, विवर्ण होगा, और प्रलय के समान स्तंभित हो जाएगा।

निष्कपटे हेनो, दशा कबे ह’बे, निरन्तर नाम गा’बो आवेशे रोहिया, देह-यात्रा कोरि’, तोमार करुना पा’बो
अर्थ

निष्कपट भाव से यह दशा मुझे कब प्राप्त होगी? तब मैं निरंतर नाम गाऊँगा। भाव में डूबा रहकर, किसी तरह देह का निर्वाह करते हुए, मैं आपकी कृपा पाऊँगा।