Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मन रे, तुमि बोरो सन्दिग्ध अन्तर

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मन रे, तुमि बोरो सन्दिग्ध-अन्तर आसियाछो ए सोंसारे बद्ध होये जोडाधरे जोडासक्त हो'ले निरन्तर
अर्थ

हे मन! तेरे भीतर बहुत संदेह भरा है। तू इस संसार में आया और जड़ जगत में बंध गया। अब तू सदा जड़ वस्तुओं में आसक्त रहता है।

भुलिया स्वकीय धाम सेबि' जोड-गत काम जोड बिन ना देखो अपर तोमार तुमित्व जिनि आच्छादित हो'ये तिनि लुप्त-प्राय देहेर भितोर
अर्थ

अपने वास्तविक धाम को भूलकर तू भौतिक कामनाओं की सेवा करता है। तुझे जड़ पदार्थ के अतिरिक्त कुछ नहीं दिखता। तेरा वास्तविक स्वरूप ढका हुआ है, और देह के भीतर लुप्त-सा हो गया है।

तुमि तो' जोडिया ज्ञान सदा कोरितेछो ध्यान तहे सृष्टि कोरो' चराचर ए दुःख कोहिबो का'रे नित्य-पति परिहरि' तुच्छ-तत्त्वे कोरिले निर्भर
अर्थ

तू सदा जड़ पदार्थ का ही चिंतन करता है, तेरे सारे कार्य भौतिक हैं। यह दुःख मैं किससे कहूँ? तूने अपने नित्य स्वामी को छोड़कर किसी तुच्छ वस्तु का आश्रय ले लिया है।

नाहि देखो' आत्म-तत्त्व छाडि दिले शुद्ध-सत्त्व आत्म हो'ते निले अबसार आत्म आछे कि ना आछे सन्देह तोमार काछे क्रमे क्रमे पाइलो आदर
अर्थ

तू आत्मा के तत्व को नहीं देखता; तूने शुद्ध सत्ता को छोड़ दिया है। तुझे आत्मा में कोई रुचि नहीं। तू धीरे-धीरे इस संदेह को ही अधिक आदर देता जाता है कि आत्मा है भी, या नहीं।

एइ रूपे क्रमे क्रमे पडिया जोडेर भ्रमे आपन आपनि हो'ले पर एबे कथा राखो मोर नाहो हओ आत्म-चोर साधु-सङ्ग कोरो' अतः पर
अर्थ

इस प्रकार तू धीरे-धीरे जड़ के भ्रम में गिरता गया, और अपने वास्तविक स्वरूप से भिन्न हो गया। अब मेरी बात मान, आत्मा का चोर मत बन, अब से साधु-संगति कर।

बैष्णबेर कृपा-बले सन्देह जैबे च'ले तुमि पुनः होइबे तोमार पा'बे बृन्दाबन-धाम सेबिबे श्री-राधा-श्याम पुलकाश्रु-मोय कलेबर
अर्थ

वैष्णवों की कृपा के बल से तेरे सारे संदेह मिट जाएँगे, और तेरी आत्मा फिर तेरी हो जाएगी। तू वृन्दावन-धाम को प्राप्त करेगा, और नेत्रों में अश्रु तथा रोमांचित देह के साथ श्री श्री राधा-कृष्ण की सेवा करेगा।

भक्तिबिनोदेर धन राधा-कृष्ण-श्री-चरण ताहे रति रहुँ निरन्तर
अर्थ

राधा-कृष्ण के श्री चरण ही भक्तिविनोद का परम धन हैं। उस धन में मेरी प्रीति निरंतर बनी रहे।