Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
मन तुमि बोरोइ चञ्चल एकान्त सरल भक्त- जने नहे अमुरक्त धूर्त-जने आसक्ति प्रबल
अर्थ

हे मन, तू बड़ा चंचल और उपद्रवी है। सरल और निष्कपट भक्तों से तेरा कोई स्नेह नहीं, परन्तु धूर्तों के प्रति तेरा गहरा आकर्षण है।

बुज्रुगी जाने जेइ तब साधु-जन सेइ ता'र सङ्ग तोमारे नाचाय क्रूर-बेश देखो जा'र श्रद्धास्पद से तोमार भक्तो कोरि पडो ता'र पाय
अर्थ

जो ढोंग करना जानता है, वही तेरे लिए साधु है, और उसकी संगति तुझे नचाती रहती है। देख, जिसका वेश क्रूर है, वही तेरी श्रद्धा का पात्र है, और तू भक्त बनकर उसके चरणों में गिरता है।

भक्त-सङ्ग होय जाँर भक्ति-फल फले ता'र अकैतबे शान्त-भाब धरो चञ्चलता छारि' मन भजो कृष्ण-श्री-चरण धूर्त-सङ्ग दूरे परिहरो'
अर्थ

जिसे साधुओं की संगति मिलती है, उसे ही भक्ति का फल प्राप्त होता है। हे मन, निष्कपट और शान्त भाव धारण कर। चंचलता को त्यागकर श्रीकृष्ण के चरणों की भक्ति कर, और धूर्तों की संगति से सदा दूर रह।