नाचत भुबन मोहन चम्पक कनक कण्ज जिनि बरण
सारे संसार का मन मोहने वाला उनका सुन्दर रूप है, और प्रभु गौर नाचते हैं। उनका वर्ण चम्पा, कमल और सोने को भी हरा देता है। उनकी सुन्दर भुजाओं पर चन्दन का लेप है। वे चमकते हुए रेशमी वस्त्र पहने हैं।
उनका मनोहर मुख शीतल चन्द्रमाओं के समूह को भी फीका कर देता है। उनकी मुस्कान मधुर अमृत की बहती हुई धारा है। उनकी भौंहें सुन्दर ढंग से तनी हुई हैं। उनके तेजस्वी, चंचल, लालिमा लिए नेत्र उगते हुए सूर्य को भी मात देते हैं।
उनकी छाती पर मणियों का हार झूल रहा है। उनकी शान्ति हर ली गई है। उनके कानों में कुण्डल चमकते हैं। उनके चमकीले केश घुँघराले हैं। उनके केश पवन में बेचैनी से हिलते हुए घने अन्धकार के समान हैं।
उनके सुन्दर हाथ कोमल कोंपलों के समान हैं। उनकी ताली में कितने सैकड़ों ताल बसे हैं? बड़े आनन्द से नरहरि उनका यश गाता है। मैं उनकी कितनी शोभाओं का वर्णन कर सकता हूँ?
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 4