निर्जन कुटीरे श्री राधा चरण
श्रीराधा के चरणों का ध्यान करते हुए मैं एक निर्जन कुटिया में रहूँगी। तब श्री रूप-मंजरी धीरे-धीरे आकर मुझसे कुछ कहेंगी।
वे कहेंगी, "हे सखी, तुम यहाँ बैठी क्यों हो? बाहर देखो, वह अनुपम सुन्दर दिव्य युगल आ चुका है। अब तुम उनके चरणों की दासी बनोगी।"
यहाँ महान् धन है, यहाँ रस की पूर्णता है, यहाँ व्रज की चंचल और तेजस्वी गोपियाँ हैं। योगियों का ध्यान और निर्विशेषवादियों का ज्ञान तुम्हें कभी यहाँ तक नहीं ला सकता।
हे राधा-चरणों की सेवा की अभिलाषी, अब तुम श्रीराधा की मध्याह्न-लीला का साक्षात् दर्शन कर सकती हो। हे सौभाग्यशालिनी सुन्दरी, श्रीराधा के चरणों की सावधानीपूर्वक सेवा करो।"