Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

निरुपम हेम ज्योति जिनि बरण

निरुपम हेम-ज्योति जिनि बरण सङ्गीते रङ्गित रण्जित चरण
अर्थ

उनका अनुपम वर्ण सोने की चमक को भी हरा देता है। उनके चरणों के तलवे लाल हैं। वे भक्तों के गीतों से आनन्दित होते हैं।

नाचत गौरचन्द्र गुण-मणिया चौदिके हरि हरि ध्वनि धनि धनिया
अर्थ

सब गुणों के रत्नों से सजे भगवान गौरचन्द्र नाचते हैं। चारों दिशाएँ “हरि! हरि!” की ध्वनि से भर गई हैं।

शरद-इन्दु-निन्दि सुन्दर बयना अहर्-निशि प्रेम निझोरे झरे नयना
अर्थ

उनका सुन्दर मुख शरद ऋतु के चन्द्रमा को फटकारता है। दिन-रात उनकी आँखों से दिव्य प्रेम के आँसू बहते रहते हैं।

बिपुल पुलक-परिपूरित देह निज रसे भासि ना पाय-इ थेह
अर्थ

उनके शरीर के रोएँ खड़े हैं। वे दिव्य प्रेम के अमृत में तैरते हैं। वे शान्त नहीं रह पाते।

जग-भरि पूरल एहेन-ओ आनन्द मही माहा बञ्चित दास गोबिन्द
अर्थ

वे सब लोकों को आनन्द से भर देते हैं। पूरी पृथ्वी पर केवल गोविन्द दास ही उस आनन्द से ठगा गया।

इस भजन के बारे में

पद
5