Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दण्डवत् 56

ष्री-वृन्दावन-दूरस्थ विप्र-भावाभिकर्षित अतपत्रायिताषेष तरु-दर्षन-हर्षित
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आप वृन्दावन से दूर रहने वाली कुछ ब्राह्मणों की पत्नियों के शुद्ध भक्तिमय प्रेम से आकृष्ट हुए। हे प्रभु, आप उन वृक्षों से प्रसन्न हुए, जो वृक्ष के रूप में उस जन्म में दूसरों के हित के कल्याणकारी कार्यों में इतने लगे हुए थे। ग्वाल-बालकों के साथ आपने यमुना नदी का अमृतमय जल अपनी पूर्ण तृप्ति तक पिया।

परोपकार-निरत तरु-जन्माभिनन्दक यमुनामृत-सन्ट्र्प्त गो-गोप-गण-सेवित
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आप उन वृक्षों से प्रसन्न हुए, जो वृक्ष के रूप में उस जन्म में दूसरों के हित के कल्याणकारी कार्यों में इतने लगे हुए थे। गायों और ग्वाल-बालकों के साथ आप

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पद
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