Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

दण्डवत् 84

जयाक्रूर-रथारूढ गोपी-रोदन-कातर षकतारूढ-नन्दादि गोपाल-गण-वेष्टित
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, आपकी जय हो। जब आप अक्रूर के रथ पर खड़े थे, तब गोपियों के विलाप सुनकर आप बहुत व्यथित हो गए। नन्द महाराज और अन्य ग्वाले भी मथुरा जाने के लिए अपनी गाड़ियों पर चढ़ चुके थे।

गोपी-वियोग-सन्तप्त राधिका-विरहासह स्वदूत-प्रेम-मिष्टोक्ति गोपिकाष्वसनाकुल
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, गोपियों से होने वाले आसन्न वियोग की पीड़ा से जलते हुए और श्रीमती राधारानी का वियोग सहन न कर पाने के कारण आपने मधुर और प्रेम भरे वचनों से गोपियों को आश्वस्त किया।

गोपी-हाहा-महा-रव रोदनार्ति-निवर्तित मृत-प्राय-व्रज-वधू चुम्बनालिण्गनासुद
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, गोपियाँ मृत्यु के कगार पर दिखाई दे रही थीं। उन्हें चूमकर और गले लगाकर आपने उन्हें अपना लिया और हाय-हाय की पुकारों से मिले हुए उनके रोने तथा उनके भारी कष्ट को रोक दिया।

प्रसीद षन्त्वानाभिज्ण नाना-षापथ-कारक कृतावधि-दीनो जीय आस-प्राण-प्रदायक
अर्थ

हे भगवान कृष्ण, मुझ पर कृपा कीजिए। आपने अनेक प्रकार के वचन देकर गोपियों को कुशलता से शान्त किया। आपने उनके प्राण लौटा दिए और उन्हें आशा दी...

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पद
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