Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पूरबे बान्धल चूडा एबे केष हीन

पूरबे बान्धल चूडा एबे केष-हीन नट-बर-बेष छाडि परिला कौपीन
अर्थ

पहले उनके केश चूड़ा बाँधकर रखे जाते थे। अब वे केशहीन हैं। नटवर की रंग-बिरंगी वेशभूषा छोड़कर अब उन्होंने संन्यासी का कौपीन पहना है।

गाभी दोहन भाण्ड छिल बाम करे करङ्ग धरिल गोरा से-इ अनुसारे
अर्थ

पहले उनके हाथ में गाय दुहने का बर्तन था। अब वे संन्यासी का कमण्डलु धारण करते हैं। अब उनका वर्ण गौर है।

त्रेताय धरिल धनु द्वापरेते बंषी कलि-युगे दण्ड धरि ह-इल सन्न्यासी
अर्थ

त्रेतायुग में उन्होंने धनुर्धर का धनुष धारण किया। द्वापरयुग में उन्होंने बाँसुरी धारण की। कलियुग में वे दण्ड धारण करते हैं। अब वे संन्यासी हैं।

बलराम कहे शुन नदिया-निबासी बलराम अबधूत काना-इ सन्न्यासी
अर्थ

बलराम दास कहते हैं: हे नदिया के निवासियो, सुनो। बलराम अवधूत बन गए हैं और कृष्ण संन्यासी बन गए हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
बलराम दास
पद
4