Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कलि युग मत्त मतङ्गज मरदने कुमति करिणी दूरे गेल

कलि-युग मत्त मतङ्गज मरदने कुमति करिणी दूरे गेल पामर दुरगत नाम मोतिम शत दाम कण्ठ भरि देल
अर्थ

कलियुग के मतवाले हाथी भाग गए हैं। कुमति रूपी हिरणियाँ दूर चली गई हैं। जो पहले पापी और भटके हुए थे, वे अब पवित्र नामों के सैकड़ों मोतियों से गुँथे हार गले में पहने हैं।

टेक
अपरूप गौर बिराज श्री-नबद्वीप नगर गिरि-कन्दरे केशरी-राज
अर्थ

प्रभु गौर रूपी अद्भुत गौर सिंह अब नवद्वीप नगर रूपी पर्वत की गुफा में प्रवेश करता है।

सङ्कीर्तन घन हुङ्कृति शुना-इते दुरित-द्वीपि-गण भाग भये आकुल अणिमादि मृगी-कुल पुन-बत गरब तेयाग
अर्थ

उस सिंह की संकीर्तन की गर्जना सुनकर पापों के बाघ डर जाते हैं और अणिमा आदि योगशक्तियों की हिरणियों का झुण्ड अपना सारा अभिमान छोड़ देता है।

त्याग याग यम तिरिखि बरत सम शश जाम्बुकी जरिजाति बलराम दास कहे अत-एब से जम-माह हरि हरि शबद खेयाति
अर्थ

त्याग, यज्ञ, संयम, व्रत और समता के खरगोश और सियार सब डरे हुए हैं। बलराम दास कहते हैं: यह प्रभु गौर के “हरि! हरि!” नाम-जप की महिमा से हुआ है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
बलराम दास
पद
4