Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

नबद्वीप गगने उयल दिन राति

नबद्वीप-गगने उयल दिन राति घन रसे सिण्चल स्थल-चर जाति
अर्थ

नवद्वीप के आकाश में दिन-रात छाया हुआ एक मेघ चलने वाले और न चलने वाले प्राणियों पर अमृत की वर्षा करता है।

देख देख गौर जलद अबतार बरिखये प्रेमे अमिया अनिबार
अर्थ

देखो, देखो! प्रभु गौर रूपी मेघ इस संसार में अवतरित हुआ है! वह बिना रुके प्रेम का अमृत बरसाता है।

तद्-अबधि जग-भरि दुर-दिन भोर हरि-रसे डगमग जग-जन भोर
अर्थ

अब पूरा संसार वर्षा से भर गया है। अब लोग भगवान कृष्ण की महिमा के अमृत में डूब गए हैं।

नाचत उनमत भकत मयुर अभकत भेक रोयत जले बुर
अर्थ

अब मतवाले मोर जैसे भक्त नाचते हैं। भिखारी जैसे अभक्त भी अमृत के जल में डूब गए हैं।

भकति लता तिन भुबन बेयाप उत्तम अधम सब प्रेम-फल पाब
अर्थ

वर्षा से पोषित भक्ति की लता बहुत बड़ी होकर तीनों लोकों में फैल जाती है। उत्तम से अधम तक सब उस लता पर लगने वाले दिव्य प्रेम के फल को चखेंगे।

कीर्तन कुलीश रोग बनचारी ज्णानसे ओ घन गरजे बिदारि
अर्थ

प्रभु गौर का मेघ कीर्तन का वज्र गिराता है, ऐसा वज्र जो नकली संन्यासियों पर गिरता है। गरजता हुआ वह मेघ एक और वज्र गिराता है, ऐसा वज्र जो निर्विशेषवादियों को टुकड़े-टुकड़े कर देता है।

चित बिलोपि कशिल करम भुजङ्ग निरमिल ओ कलि-मद दहन तरङ्ग
अर्थ

एक और वज्र कर्म के साँप के हृदय को चीरकर दो टुकड़े कर देता है। फिर कलियुग के भ्रमित करने वाले मोह उस वर्षा की अमृत की उमड़ती लहरों में डूब जाते हैं।

तापित चातक तिरपित भेल दश-दिक सबहुं नदी रहि गेल
अर्थ

भक्त रूपी प्यासे चातक पक्षी उस मेघ से गिरता अमृत पीकर सब तृप्त हो गए हैं। अब दसों दिशाओं में अमृत की नदियाँ उमड़ रही हैं।

डुबल अबनी काहो नाहि ठाम संसारेर अचले रहलु बलराम
अर्थ

पूरा संसार प्रेम के उमड़ते अमृत में डूब गया है। कहीं बचने का स्थान नहीं है। केवल बलराम दास बच गया है। जन्म और मृत्यु के बार-बार चलने वाले संसार के सूखे पर्वत शिखर पर खड़ा होकर वह उस बाढ़ से बच गया है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
बलराम दास
पद
9