राधा कृष्ण सेवों मुञि
मैं इस जीवन में और मृत्यु के बाद भी राधा-कृष्ण की सेवा करूँगा। रात और दिन मैं उनके दिव्य धाम और लीला का दर्शन करूँगा।
युगल-किशोर जिस स्थान पर जो लीला करते हैं, मैं सखियों की संगिनी बनकर वहाँ जाऊँगा, और भोर होने तक उनके साथ रहूँगा।
मैं निरंतर श्री रूप-मंजरी के चरणों की सेवा करूँगा। उनके चरण-कमल ही मेरा मंत्र और मेरी महौषधि हैं।
हे श्री रति-मंजरी देवी, मुझ पर कृपा करो। मुझे हर क्षण अपने चरण-कमल की छाया दो।
हे श्री रास-मंजरी देवी, मुझ पर ध्यान दो। मुझे हर क्षण अपने चरण-कमलों का ध्यान करने दो।
वृन्दावन में युगल की नित्य लीला चलती है, उसमें मुझे स्थान मिले। नरोत्तम दास सदा यही प्रार्थना करते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरोत्तम दास ठाकुर · जीवनी पढ़ें
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- 6
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।