Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

रति प्रेम स्नेह मान प्रणय ओ रागाख्यान

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टेक्स्ट
रति प्रेम स्नेह मान प्रणय ओ रागाख्यान अनुराग भाब एइ सात रति जत गाढ होय क्रमे सप्त नाम लोय स्थायी भाब सदा अबदात
अर्थ

माधुर्य रस के स्थायी भाव की सात अवस्थाएँ हैं: प्रेम, स्नेह, मान, प्रणय, राग, अनुराग और भाव। रति जितनी गहरी होती जाती है, उतना ही क्रम से वह इन सात नामों को पाती है। यह स्थायी भाव सदा निर्मल रहता है।

स्नेहादि जे भाब छोय प्रेम नामे परिचोय साधारण जनेर निकटे जे भाब कृष्णेते जाँर सेइ भाबे कृष्ण ताँर ए रहस्य रसे नित्य बटे
अर्थ

स्नेह से आरम्भ होने वाले ये छह भाव सामान्य लोगों के बीच 'प्रेम' नाम से ही जाने जाते हैं। भक्त जिस भाव से कृष्ण से प्रेम करता है, कृष्ण भी उसी भाव से उस भक्त से प्रेम करते हैं। रस का यह रहस्य नित्य है।

भक्त-चित्त-सिंहासन त'ते उपबिष्ट हन स्थायी भाब सर्ब-भाब-राज ह्लादिनी जे पर शक्ति ताँरसार शुद्ध-भक्ति भाब-रूपे ताँहार बिराज
अर्थ

भक्त के हृदय के सिंहासन पर बैठा हुआ स्थायी भाव सब भावों का राजा है। ह्लादिनी नाम की जो परा शक्ति है, उसका सार शुद्ध भक्ति है, और वही इस भाव के रूप में विराजती है।

बिभाबादि भाब-गणे निजायत्ते आनयने कोरेन ये रसेर प्रोकाश रस नित्यानन्द-तत्त्व नित्य-सिद्ध सार-सत्त्व जीब-चित्ते ताहार बिकाश
अर्थ

स्थायी भाव विभाव आदि सभी भावों को अपने वश में लाकर रस को प्रकट करता है। यह रस नित्य आनन्दमय तत्त्व है, नित्य-सिद्ध है, सबसे उत्तम है, और जीव के हृदय में खिलता है।