Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

शचि सुत गौर हरि नबद्वीपे अबतारि

शचि-सुत गौर-हरि नबद्वीपे अबतारि करिलेन बिबिध बिलास सङ्गे लैया अप्रिय-गण प्रकाशिल सङ्कीर्तन बाढा-इल सबार उल्लास
अर्थ

नवद्वीप में इस संसार में अवतरित होकर भगवान गौरहरि शची के पुत्र बने और उन्होंने अनेक लीलाएँ कीं। अपने प्रिय पार्षदों के साथ संकीर्तन करके उन्होंने सबको आनन्द से भर दिया।

किबा से सन्न्यास बेशे भ्रमि प्रभु देशे देशे नीलाचले आसिया रहिल राधिकार प्रेमे माति ना जानि दिवा-राति से प्रेमे जगत माता-इल
अर्थ

संन्यासी का वेश धारण करके प्रभु ने स्थान-स्थान पर भ्रमण किया। फिर वे सदा के लिए नीलाचल में ही रहे। श्रीमती राधारानी के प्रेम में उन्मत्त होकर उन्हें दिन और रात का पता नहीं रहता था। उन्होंने सारे जगत् को उसी तरह के दिव्य प्रेम से उन्मत्त कर दिया।

नित्यानन्द बलराम अद्वैत गुणेर धाम गदाधर श्रीबासादि यत देखि से अद्भुत रीति केह ना धरये धृति प्रेमाय बिह्वल अबिरत
अर्थ

भगवान गौरहरि की अद्भुत लीलाएँ देखकर न भगवान नित्यानन्द-बलराम, न अप्राकृत गुणों के धाम अद्वैत आचार्य, न गदाधर, न श्रीवास, और न कोई और शान्त रह सका। सब के सब निरन्तर दिव्य प्रेम से विह्वल रहे।

देबेर दुर्लभ रत्न मिला-इला करि यत्न कृपाय बाला-इ लैया मरि कैला कलि-युग धन्य प्रभु कृष्ण-चैतन्य यश गाय दास नरहरि
अर्थ

भगवान गौरहरि अपने साथ दुर्लभ और बहुमूल्य रत्न सावधानी से लाए, ऐसे रत्न जिन्हें देवता भी नहीं पा सकते। प्रभु ने कृपा करके वे रत्न सबको बाँट दिए। और इस तरह उन्होंने कलियुग को गौरवशाली और भाग्यशाली समय बना दिया। नरहरि दास भगवान कृष्ण चैतन्य की महिमा इसी तरह गाते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4