संसार दावानल लीढ लोक
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5 रिकॉर्डिंगगुरुदेव को कृपा के सागर से यह वरदान प्राप्त हुआ है। जैसे बादल वर्षा करके वन की अग्नि को शान्त कर देता है, वैसे ही गुरुदेव संसार की धधकती हुई भवाग्नि को बुझाकर संसार से पीड़ित जीवों का उद्धार करते हैं। ऐसे कल्याणकारी गुणों के सागर, गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
हरिनाम कीर्तन करते हुए, आनन्द में नृत्य करते हुए, गान करते हुए और वाद्य बजाते हुए, गुरुदेव सदैव चैतन्य महाप्रभु के संकीर्तन में आनन्दित रहते हैं। शुद्ध भक्ति के रस का आस्वादन करने के कारण कभी उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं, कभी उनका शरीर काँपने लगता है और कभी उनकी आँखों से अश्रुओं की धारा बह चलती है। ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
गुरुदेव सदैव श्री श्री राधा-कृष्ण की मन्दिर-सेवा में लगे रहते हैं और अपने शिष्यों को भी इस सेवा में लगाते हैं। वे विग्रहों को सुन्दर वस्त्र और आभूषणों से सजाते हैं, उनके मन्दिर की सफाई करते हैं और भगवान की अन्य प्रकार की सेवा करते हैं। ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
गुरुदेव सदा कृष्ण को चार प्रकार के स्वादिष्ट भोग (चाटने, चबाने, पीने और चूसने वाले) अर्पित करते हैं। जब गुरुदेव देखते हैं कि भक्तगण भगवत्प्रसाद पाकर तृप्त हुए हैं, तो वे स्वयं तृप्त होते हैं। ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
गुरुदेव सदैव राधिका और माधव की असीम प्रेम-लीलाओं तथा उनके गुणों, नामों और रूपों को सुनने और कीर्तन करने के लिए उत्सुक रहते हैं। गुरुदेव प्रतिक्षण इनका आस्वादन करने की लालसा रखते हैं। ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
गुरुदेव अत्यन्त प्रिय हैं, क्योंकि वे उन गोपियों की सहायता करने में निपुण हैं, जो वृन्दावन की कुंजों में राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं की सिद्धि के लिए समय-समय पर तरह-तरह की सुन्दर व्यवस्थाएँ करती हैं। ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में मैं अत्यन्त विनम्रता से प्रणाम करता हूँ।
गुरुदेव का सम्मान साक्षात् भगवान के समान किया जाना चाहिए, क्योंकि वे भगवान के सबसे घनिष्ठ सेवक हैं। समस्त शास्त्रों में यह स्वीकार किया गया है और सभी आचार्य इसका पालन करते हैं। इसलिए मैं ऐसे गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में सादर प्रणाम करता हूँ, जो श्री हरि के प्रामाणिक प्रतिनिधि हैं।
गुरुदेव की कृपा से ही कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। गुरुदेव की कृपा के बिना कोई भी उन्नति सम्भव नहीं है। इसलिए मुझे सदैव गुरुदेव का स्मरण और गुणगान करना चाहिए। मुझे दिन में कम से कम तीन बार अपने गुरुदेव के श्रीचरणकमलों में प्रणाम करना चाहिए।
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।