Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

सन्दर्शन संस्पर्शन जल्प बर्त्म निरोधन

Read in English

दिखाएँ
टेक्स्ट
सन्दर्शन संस्पर्शन जल्प बर्त्म-निरोधन रास बृन्दाबन-लीला भूरि जल-केलि जमुनाय नौका-खेला चौर्यताय घट्ट-लीला कुञ्जे लुकोचुरि
अर्थ

सम्भोग की लीलाओं में ये सम्मिलित हैं: दर्शन करना, स्पर्श करना, वार्तालाप करना, मार्ग रोकना, रासलीला, वृन्दावन वन की अनेक लीलाएँ, यमुना जल में क्रीड़ा, नौका-विहार, चोरी की लीला, घाट की लीला और कुञ्ज में लुका-छिपी।

मधु-पान बधू-बेश कपट निद्रा-आबेश द्यूत-क्रीडा बस्त्र टानाटानि चुम्बाश्लेष नखार्पण बिम्बाधर सुधा-पान सम्प्रजोग आदि लीला मानि
अर्थ

मधुपान, कृष्ण का स्त्री-वेश धारण करना, सोने का बहाना, द्यूत-क्रीड़ा, वस्त्र खींचना, चुम्बन, आलिंगन, नखों से खरोंचना, एक-दूसरे के बिम्बाधर से अमृत-पान करना और मिलन-सुख, इन्हीं लीलाओं का मैं ध्यान करता हूँ।

सम्भोग प्रकार सब सम्भोगेर महोत्सब लीला होय सदा सु-पेशल सेइ लीला अपरूप उज्ज्वल रसेर कूप ताहे जार होय कौतूहल
अर्थ

सम्भोग के इन सभी प्रकारों से आनन्द का महान् उत्सव होता है। ये लीलाएँ सदा अत्यन्त सुन्दर और अद्भुत होती हैं। ये उज्ज्वल-रस के अमृत से भरा एक विशाल कुआँ हैं। जो कोई इन लीलाओं को पाने के लिए उत्सुक है…

चिद्-बिलास रस-भोरे रति-भाब रस धोरे महा-भाब पर्जन्त बडय जे जीब सौभाग्यबान् लीला-जोगे सु-सन्धान् ब्रजे बासि' सतत कोरय
अर्थ

…रति से आरम्भ होकर महाभाव तक बढ़ने वाली इन दिव्य लीलाओं को पाने वाला जीव अत्यन्त सौभाग्यशाली है। व्रज में निवास करते हुए वह सदा इन्हीं लीलाओं में प्रवेश पाने का प्रयास करता रहता है।