सन्दर्शन संस्पर्शन जल्प बर्त्म निरोधन
सम्भोग की लीलाओं में ये सम्मिलित हैं: दर्शन करना, स्पर्श करना, वार्तालाप करना, मार्ग रोकना, रासलीला, वृन्दावन वन की अनेक लीलाएँ, यमुना जल में क्रीड़ा, नौका-विहार, चोरी की लीला, घाट की लीला और कुञ्ज में लुका-छिपी।
मधुपान, कृष्ण का स्त्री-वेश धारण करना, सोने का बहाना, द्यूत-क्रीड़ा, वस्त्र खींचना, चुम्बन, आलिंगन, नखों से खरोंचना, एक-दूसरे के बिम्बाधर से अमृत-पान करना और मिलन-सुख, इन्हीं लीलाओं का मैं ध्यान करता हूँ।
सम्भोग के इन सभी प्रकारों से आनन्द का महान् उत्सव होता है। ये लीलाएँ सदा अत्यन्त सुन्दर और अद्भुत होती हैं। ये उज्ज्वल-रस के अमृत से भरा एक विशाल कुआँ हैं। जो कोई इन लीलाओं को पाने के लिए उत्सुक है…
…रति से आरम्भ होकर महाभाव तक बढ़ने वाली इन दिव्य लीलाओं को पाने वाला जीव अत्यन्त सौभाग्यशाली है। व्रज में निवास करते हुए वह सदा इन्हीं लीलाओं में प्रवेश पाने का प्रयास करता रहता है।