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“गौर आरती” के परिणाम

439 भजन · 566 पद भजन के शब्दों में

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8 पद भजन में 6

सार्वभौम भट्टाचार्य · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    नव गौर-वरं नव-पुष्प-शरं
    नव-भाव-धरं नव-लास्य-परम्
    नव-हास्य-करं नव-हेम-वरं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 2भजन
    नव-प्रेम-युतं नव-नीत-शुचं
    नव-वेश-कृतं नव-प्रेम-रसम्
    नवधा विलसत् शुभ-प्रेम-मयं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    हरि-भक्ति-परं हरि-नाम-धरं
    कर-जप्य-करं हरि-नाम-परम्
    नयने सततं प्रणयाश्रु-धरं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 4भजन
    सततं जनता-भव-ताप-हरं
    परमार्थ-परायण-लोक-गतिम्
    नव-लेह-करं जगत्-ताप-हरं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 5भजन
    निज-भक्ति-करं प्रिय-चारुतरं
    नट-नर्तन-नागर-राज-कुलम्
    कुल-कामिनि-मानस-लास्य-करं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 6भजन
    करताल-वलं कल-कण्ठ-रवं
    मृदु-वाद्य-सुवीणिकया मधुरम्
    निज-भक्ति-गुणावृत-नात्य-करं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 7भजन
    युग-धर्म-युतं पुनर् नन्द-सुतं
    धरणी-सुचित्रं भव-भावोचितम्
    तनु-ध्यान-चितं निज-वास-युतं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
  • पद 8भजन
    अरुणं नयनं चरणं वसनं
    वदने स्खलितं स्वक-नाम-धरम्
    कुरुते सु-रसं जगतः जीवनं
    प्रणमामि शची-सुत-गौर-वरम्
7 पद भजन में 4

नरहरि सरकार

  • पद 1भजन
    मन रे! कह ना गौर कथा
    गौरेर नाम, अमियार धाम, पिरीति मूरति दाता
  • पद 2भजन
    शयने गौर, स्वपने गौर, गौर नयनेर तारा
    जीवने गौर, मरणे गौर, गौर गलार हारा
इस भजन में 5 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    हियार माझारे, गौराङ्ग राखिया, विरले बसिया रब
    मनेर साधेते, से रूप-चादेरे, नयने नयने थोब
  • पद 4भजन
    गौर विहने, न वञ्छि पराणे, गौर क'रेछि सार
    गौर बलिय, जौक जीवने, किछु ना चाहिब आर
  • पद 5भजन
    गौर गमन, गौर गठन, गौर मुखेर हासि
    गौर-पिरीति, गौर मूरति, हीयाय रहल पशि
  • पद 6भजन
    गौर धरम, गौर करम, गौर वेदेर सार
    गौर चरणे, पराण सम्पिनु, गौर करिबेन पार
  • पद 7भजन
    गौर शबद, गौर सम्पद, जाहार हियाय जागे
    नरहरि दास, ताहार चरणे, सतत शरण मागे
8 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    जय जय गौर-हरि शचीर नन्दन
    श्री-चैतन्य बिश्वम्भर पतित-पाबन
  • पद 2भजन
    जय महाप्रभु गौरचन्द्र दयामय
    अधम-तारण नाथ बहक्त-आश्रय
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    जीबेर जीबन गोर करुणा-सागर
    जगन्नाथ-मिश्र-सुत गौराङ्ग-सुन्दर
  • पद 4भजन
    प्रेममय प्रेम-दाता जगतेर गुरु
    श्री-गौर गोपालदेव बाञ्छा-कल्प-तरु
  • पद 20भजन
    . बिश्व-रूप बिश्व-नाथ बिश्व-बिमोहन
    श्री-गौर गोबिन्द भक्त-चित्त-सुरञ्जन
  • पद 28भजन
    गौराङ्ग मधुर नाम कर मन सार
    यांहा बिना कलि-युगे गति नाहि आर
  • पद 30भजन
    . गौर-नाम हरि-नाम एक-इ ये हय
    भागबत बाक्य ए-इ कभु मिथ्या नय
  • पद 32भजन
    गौर-नाम कृष्ण-नाम अति सु-मधुर
    सदा आस्वादये ये-इ से सब चतुर
8 पद भजन में

सार्वभौम भट्टाचार्य

  • पद 1भजन
    मलय-सुवासित-भूषित-गात्रम्
    मूर्ति-मनोहर-विश्व-पवित्रम्
    पद-नख-राजित-लज्जित-चन्द्रे
    शुद्ध-कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 2भजन
    स्व-गात्र पुलक लोचन पूर्णम्
    जीव दया-मय ताप-विदीर्णम्
    सङ्ख्या जल-पति नाम सहस्रे
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
इस भजन में 6 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    हुङ्कृत तर्जन गर्जन रङ्गे
    लोचन कलि-युग पाप स शङ्के
    पद रज ताडित दुष्ट समस्ते
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 4भजन
    सिंह गमन जिति ताण्डव लीला
    दीन दया-मय तारण शीला
    अज भव पद-नख चन्द्रे
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 5भजन
    गौराङ्गावृत मालती माले
    मेरु विलम्बित गङ्गा धारे
    मन्द मधुर हास भाष मुख चन्द्रे
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 6भजन
    फल्गु विराजित चन्दन भाल
    कुङ्कुम् राजित देह विशाल
    उमापति सेवित पद नख चन्द्रे
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 7भजन
    भक्ति पराधीन शान्तक वेश
    गमन सुनर्तक भोग विशेष
    माला विराजित देह समस्ते
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
  • पद 8भजन
    भोग विरक्तिक संन्यासी वेश
    शिखा मोचन लोक प्रवेश
    भक्ति विरक्तिक प्रवर्तक चित्त
    शुद्ध कनक जय गौर नमस्ते
4 पद भजन में 9

नरोत्तम दास ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    गौराङ्गेर दुटि पद, जार् धन सम्पद,
    से जाने भकति-रस-सार्
    गौराङ्गेर मधुर-लीला, जार् कर्णे प्रवेशिला,
    हृदोय निर्मल भेलो तार्
  • पद 2भजन
    जे गौराङ्गेर नाम लोय्, तार होय् प्रेमोदोय्,
    तारे मुइ जाइ बोलिहारि
    गौराङ्ग-गुणेते झुरे, नित्य-लीला तारे स्फुरे,
    से जन भकति-अधिकारी
इस भजन में 2 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    गौराङ्गेर सङ्गि-गणे, नित्य-सिद्ध कोरि' माने,
    से जाय् ब्रजेन्द्र-सुत-पाश्
    श्री-गौड-मण्डल-भूमि, जेबा जाने चिन्तामणि,
    तार होय् ब्रज-भूमे बास्
  • पद 4भजन
    गौर-प्रेम-रसार्णवे, से तरङ्गे जेबा डुबे,
    से राधा-माधव-अन्तरङ्ग
    गृहे बा वनेते थाके, 'हा गौराङ्ग' बो'ले डाके,
    नरोत्तम मागे तार सङ्ग
3 पद भजन में 10

वासुदेव घोष · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    यदि गौर ना होइतो, तबे कि होइतो,
    केमोने धरिताम् दे
    राधार् महिमा, प्रेम-रस-सीमा,
    जगते जानातो के
  • पद 3भजन
    गाओ गाओ पुनः, गौराङ्गेर् गुण,
    सरल कोरिया मन
    ए भव-सागरे, एमोन दोयाल्,
    ना देखिये एक-जन
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 4भजन
    (आमि) गौराङ्ग बोलिया, ना गेनु गलिया,
    केमोने धोरिनु दे
    वासुर् हिया, पाषाण दिया,
    केमोने गडियाछे
2 पद भजन में 6

नरोत्तम दास ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के और भजन

  • पद 1भजन
    गौराङ्ग करुणा कोरो, दीन हीन जने
    मो-समो पतित प्रभु, नाहि त्रि-भुवने
  • पद 2भजन
    दन्ते तृण धोरि' गौर, डाकि हे तोमार्
    कृपा कोरि' एसो आमार्, हृदोय मन्दिरे
2 पद भजन में 5

भक्तिविनोद ठाकुर · वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    कबे गौर-बने, सुरधुनी-तटे,
    "हा राधे हा कृष्ण" बो'ले
    कान्दिया बेड़ाबो, देहो-सुख छाड़ि,
    नाना-लता तरु-तले
  • पद 4भजन
    (कबे) गौर-ब्रज-बने, भेद ना कोरिया,
    होइबो बरज-बासी
    (तखन) धामेर स्वरूप, स्फुरिबे नयने,
    होइबो राधार दासी
3 पद भजन में

गोविन्द दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    अद्वैत आचार्य गौराङ्ग-शिरे
    ढारत जाह्नबी-बारि धीरे धीरे
  • पद 3भजन
    पट्ट-बसन ले-इ श्रीबास पण्डित
    गौर-कलेबरे करल बेष्टित
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    गौरी-दास शिरे धरल छत्र
    नरहरि ब्यजने ब्यजये गात्र
3 पद भजन में

नरहरि दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    गौराङ्ग के जाने महिमा तोमार
    कलि-युग उद्धारिते पतित-पाबन अबातर
  • पद 2भजन
    श्याम-महोदधि केमने बिधाता
    मथिया से कर-ताल
    कत सुधा-रस ताहे निरम्निया
    उपजिल गौराङ्ग रसाल
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    त्रि-भुबने प्रेम बादर ह-इल
    गौर-प्रेम-बरिषणे
    दीन हीन जन ओ रस मगन
    नरहरि गुण गाने
3 पद भजन में

नरहरि दास · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    गौराङ्ग नहिते तबे कि ह-इते
    केमने धरिते दे
    राधार महिमा प्रेम-रस-सीमा
    जगते जाना-इते के
  • पद 3भजन
    गा-ओ पुनः पुनः गौराङ्गेर गुण
    सरल ह-इय मन
    ए भब-सागरे एमन दयाल
    न देखि ये एक-जन
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 4भजन
    गौराङ्ग बलिया न गेनु गलिया
    केमने धरिनु दे
    नरहरि हिया पाषाण दिया
    केमन गडियाछे
3 पद भजन में

वासुदेव घोष · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    नदीया आकाशे आसि उदिल गौराङ्ग-शशी
    भासिल सकले कुतूहले
    लाजेते गगन-शशी माखिल बदने मसी
    काल पेये ग्रहणेर छले
  • पद 4भजन
    ग्रहणेर अन्धकारे केह ना चिह्नेर करे
    देब नरे हइल मिशामिशि
    नदीया नगरी सङ्गे देब-नारी आसि रङ्गे
    हेरिछे गौराङ्ग रूप -राशि
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    पुत्रेर बदन देखि जगन्नाथ महा-सुखी करे दान दरिद्र सकले
    भुबन आनन्द-मय गौर-बिधु समुदय
    बसु कहे जीब-भाग्य-फले
3 पद भजन में

वृन्दावन दास ठाकुर · गौड़ीय वैष्णव आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    गौर गोविन्द-गँअ शुन हे रसिक-जन
    बिष्ँउ महा-बिष्ँउ पर पहुं
    याँर पद-नख-द्युति परम ब्रह्मेर स्थिति
    सुर-मुनि प्राँएर गँअ तुहुं
  • पद 2भजन
    अन्तरे बरँअ भिन्न बाहिरे गौराङ्ग चिह्न
    श्री-राधार अङ्ग-कान्ति राजे
    शत-दल-कमल हेम-कर्ँइकार माझे
    बिहर-इ चारि द्वारि साजे
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  • पद 5भजन
    सहस्र सहस्र काँए लोलिया लोलिया पडे मुखे
    सृजि दु-इ जिह्वाय गौरचन्द्र गुँअ गाय
    पद-पद्मे महा-लक्ष्मी बुके
3 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    आरे मोर गौर-किशोर
    सहचर कन्धे पहुं भुज-युग आरोपिया
    नबमी दशाय भेल भोर
  • पद 2भजन
    पडिया क्षितिर परे मुखे बाक्य नाहि सरे
    साहसे परशे नाहि केह
    सोणार गौर-हरि कहे हाय मरि मरि
    तन्तुक दोसर भेल देह
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 3भजन
    थिर नयन करि मथुरा नाम धरि
    रो-अये हा नाथ बलिया
    बसु रामानन्द बणे गौराङ्ग एमन केन
    ना बुझिनु किसेर लगिया
3 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    गौर पहुं ना भजिय मनु
    प्रेम-रतन धन हेलाय हारानु
  • पद 3भजन
    बिषम बिषय बिष सतत खा-इनु
    गौर-कीर्तन-रसे मगन ना हैनु
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    एमन गौराङ्गेर गुणे ना कान्दिल मन
    मनुष्य दुर्लभ जन्म हैल अकारण
3 पद भजन में

श्री गौरांग और गोविन्द की महिमा में आचार्यों के भजन

  • पद 1भजन
    अशेष गुणेर निधि गौराङ्ग-सुन्दर
    आनन्दे बिभोर सदा नदीया-नागर
  • पद 5भजन
    लिप्त श्री-गौराङ्ग-तनु श्री-हरिचन्दने
    लीलाबती नारी हेरि हय अचेतने
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 8भजन
    चतुर्दश स्वराबली ये करे कीर्तन
    अचिरे लभये से-इ गौराङ्ग-चरण
3 पद भजन में

भक्तिविनोद ठाकुर

  • पद 1भजन
    'हरि' बोले' मोदेर गौर एलो
  • पद 2भजन
    एलो रे गौराङ्ग-चान्द प्रेमे एलोथेलो
    निताइ-अद्वैत-सङ्गे गोद्रुमे पशिलो
इस भजन में 1 और मिलान दिखाएँ
  • पद 5भजन
    नदीया भ्रमिते गोरा एलो नामेर हाटे
    गौर एलो हाटे, सङ्गे निताइ एलो हाटे