Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रद्धा देबि नाम जार दुइति स्वभाब तार

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श्रद्धा-देबि नाम जार दुइति स्वभाब तार बिधि-मूल रुचि-मूल भेदे शास्त्रेर शासन जबे श्रद्धार उदोय हो'बे बैधी श्रद्धा तारे बोले बेदे
अर्थ

श्रद्धा-देवी के दो स्वभाव हैं, एक विधि-मूल, दूसरा रुचि-मूल। जब शास्त्रों के अनुशासन का पालन करने से श्रद्धा का उदय होता है, तब वेद उसे वैधी श्रद्धा कहते हैं।

ब्रज-बासी सेबे कृष्णे सेइ शुद्ध-सेबा दृष्टे जबे होय श्रद्धार उदोय लोभमोयी श्रद्धा सती रागानुगा शुद्धा मति बहु भाग्ये साधक लभोय
अर्थ

व्रजवासियों की शुद्ध सेवा को देखकर साधक के हृदय में श्रद्धा का उदय होता है। बड़े सौभाग्य से ही साधक को वह लोभमयी, दिव्य और शुद्ध रागानुगा श्रद्धा प्राप्त होती है।

श्रद्धा-भेदे भक्ति-भेदे गाइतेछेछे चतुर्-बेद बैधी रागानुगा भक्ति द्वोय साधन-समोये जैछे सिद्धि-काले प्राप्ति तैछे एइ-रूप भक्ति-शास्त्रे कोय
अर्थ

श्रद्धा के भेद से भक्ति के भी भेद होते हैं, यही चारों वेद गाते हैं। वैधी और रागानुगा भक्ति के ये दो रूप हैं। साधन के समय जैसी भक्ति होती है, सिद्धि के समय भी वैसी ही प्राप्ति होती है। भक्ति-शास्त्र यही कहते हैं।

बैधी भक्ति धीर गति रागानुगा तीब्र अति अति शीघ्र रसाबस्था पाय राग-बर्त्म-सु-साधने रुचि होय जार मने रूपानुग होइते सेइ धाय
अर्थ

वैधी भक्ति धीरे चलती है, रागानुगा भक्ति बहुत तेज़ है, उससे बहुत जल्दी रस की अवस्था मिलती है। राग-मार्ग की साधना से हृदय में रुचि जागती है। रूपानुग भक्त इसी मार्ग पर दौड़ते हैं।