Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्रीबास बचन श्रबण कोरिया

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टेक्स्ट
श्रीबास-बचन श्रबण कोरिया साध्वी पति-ब्रत-गण शोक परिहरि' मृत शिशु राखि' हरि-रसे दिलो मन
अर्थ

श्रीवास के वचन सुनकर पतिव्रता साध्वी स्त्रियों ने शोक छोड़ दिया। मृत बालक को सँभालकर रखते हुए उन्होंने अपना मन हरि-रस में लगा दिया।

श्रीबास तखन आनन्दे मातिया अङ्गने ऐलो पुनः नाचे गोरा-सने सकल पासरि' गाय नन्द-सुत-गुण
अर्थ

आनन्द से विभोर श्रीवास फिर आँगन में आए। सब कुछ भूलकर वे चैतन्य महाप्रभु के साथ नाचने लगे और कृष्ण के गुणों का गान करने लगे।

चारि दण्ड रात्रे मारिलो कुमार अङ्गने केहो ना जाने श्री-नाम-मङ्गले तृतीय प्रहर रजनी अतीत गाने
अर्थ

रात्रि के चार दण्ड (लगभग डेढ़ घण्टे) बीतते ही बालक का प्राणान्त हो गया, परन्तु आँगन में किसी को इसका पता न चला। रात्रि का तीसरा प्रहर बीत गया और सब लोग तब भी पवित्र नाम की मंगल महिमा का गान करते रहे।

कीर्तन भङ्गिले कोहे गौर-हरि आजि केनो पाइ दुःख बुझि एइ गृहे किछु अमङ्गल घटिया हरिलो सुख
अर्थ

कीर्तन रुका तो गौरहरि बोले, "आज मुझे दुःख क्यों हो रहा है? लगता है इस घर में कुछ अमंगल हुआ है, जिसने मेरा सुख छीन लिया है।"

तबे भक्त-जन निबेदन कोरे श्रीबास-शिशुर कथा शुनि' गोरा राय बोले हाय हाय मरमे पाइनु ब्यथा
अर्थ

तब भक्तों ने सारी बात कह सुनाई। श्रीवास के पुत्र का समाचार सुनकर चैतन्य महाप्रभु बोले, "हाय! हाय! इससे मेरे हृदय को पीड़ा हुई है।"

केनो ना कोहिले आमारे तखन बिपद-सम्बद सबे भकतिबिनोद भकत-बत्सल स्नेहेते माजिलो तबे
अर्थ

"उस समय आपने यह विपत्ति का समाचार मुझे क्यों नहीं बताया?" भक्तों से अपार प्रेम करने वाले चैतन्य महाप्रभु के प्रति भक्तिविनोद का हृदय प्रेम में डूब गया।