श्रीबास बचन श्रबण कोरिया
श्रीवास के वचन सुनकर पतिव्रता साध्वी स्त्रियों ने शोक छोड़ दिया। मृत बालक को सँभालकर रखते हुए उन्होंने अपना मन हरि-रस में लगा दिया।
आनन्द से विभोर श्रीवास फिर आँगन में आए। सब कुछ भूलकर वे चैतन्य महाप्रभु के साथ नाचने लगे और कृष्ण के गुणों का गान करने लगे।
रात्रि के चार दण्ड (लगभग डेढ़ घण्टे) बीतते ही बालक का प्राणान्त हो गया, परन्तु आँगन में किसी को इसका पता न चला। रात्रि का तीसरा प्रहर बीत गया और सब लोग तब भी पवित्र नाम की मंगल महिमा का गान करते रहे।
कीर्तन रुका तो गौरहरि बोले, "आज मुझे दुःख क्यों हो रहा है? लगता है इस घर में कुछ अमंगल हुआ है, जिसने मेरा सुख छीन लिया है।"
तब भक्तों ने सारी बात कह सुनाई। श्रीवास के पुत्र का समाचार सुनकर चैतन्य महाप्रभु बोले, "हाय! हाय! इससे मेरे हृदय को पीड़ा हुई है।"
"उस समय आपने यह विपत्ति का समाचार मुझे क्यों नहीं बताया?" भक्तों से अपार प्रेम करने वाले चैतन्य महाप्रभु के प्रति भक्तिविनोद का हृदय प्रेम में डूब गया।