Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

तोमार चरण पद्म अनुराग सुधा सद्म

हरि हे तोमार चरण-पद्म अनुराग सुधा-सद्म सागर-शीकर जदि पाय कोन भाग्यबान जने कोन कार्य-सङ्गटने ता'र सब दुःख दूरे जाय
अर्थ

हे कृष्ण! आपके चरण-कमलों से बहने वाले प्रेम के सागर से यदि किसी भाग्यशाली जीव को एक बूँद भी अमृत मिल जाए, तो उसके सारे दुःख दूर भाग जाते हैं।

से सुधा-समुद्र-कण सोंसाराग्नि-निर्बापन खणेते कोरिया फेले ता'र परम निबृत्ति दिया तोमार चरणे लोय देय तबे आनन्द अपार
अर्थ

उस अमृत-सागर की एक बूँद ही एक क्षण में जन्म-मृत्यु की अग्नि को शान्त कर देती है। वह मुक्ति देती है, वह जीव को आपके चरणों तक ले जाती है, और वह असीम आनन्द प्रदान करती है।

ए भक्तिबिनोद कान्दे पोडिया सोंसार-फान्दे बोले नाहि कोन भाग्य मोर ए घटन ना घटिलो आमार जनम गेलो बृथा रोइनु हो'ये आत्म-भोर
अर्थ

संसार के जाल में फँसा भक्तिविनोद रोता है। वह कहता है, मेरा कोई सौभाग्य नहीं है, मुझे सौभाग्य कभी नहीं मिला। मेरा जीवन बीत गया, मैंने इसे अपने ही स्वार्थ में व्यर्थ खो दिया।

इस भजन के बारे में

ग्रन्थ
गीतमाला
पद
3