तोमार चरण पद्म अनुराग सुधा सद्म
हे कृष्ण! आपके चरण-कमलों से बहने वाले प्रेम के सागर से यदि किसी भाग्यशाली जीव को एक बूँद भी अमृत मिल जाए, तो उसके सारे दुःख दूर भाग जाते हैं।
उस अमृत-सागर की एक बूँद ही एक क्षण में जन्म-मृत्यु की अग्नि को शान्त कर देती है। वह मुक्ति देती है, वह जीव को आपके चरणों तक ले जाती है, और वह असीम आनन्द प्रदान करती है।
संसार के जाल में फँसा भक्तिविनोद रोता है। वह कहता है, मेरा कोई सौभाग्य नहीं है, मुझे सौभाग्य कभी नहीं मिला। मेरा जीवन बीत गया, मैंने इसे अपने ही स्वार्थ में व्यर्थ खो दिया।