Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

निशि परभात समये ये रूप आनन्द शचीर घरे

निशि परभात समये ये-रूप आनन्द शचीर घरे शत शत युगे सहस्र बदने किञ्चित् बर्णिते नारे
अर्थ

भोर के समय शची के घर में बड़ा आनन्द भर जाता है। भगवान शेष अपने हजार मुखों से सैकड़ों-सैकड़ों युगों तक बोलते रहें, तब भी उसका थोड़ा-सा भी वर्णन नहीं कर सकते।

निज जने सुख दिते कत रङ्ग जानये गौरचान्द बुझिबा आङ्गिना माझेते फान्दिल भुबन-मोहन फान्द
अर्थ

बालक गौरचन्द्र अपने साथियों को कितना आनन्द देते हैं? मैं समझता हूँ कि शची के आँगन में एक जाल बिछा हुआ है, ऐसा जाल जो सब लोकों को मोह लेता है।

शेज तेजि धाञा धाञा यत जन आ-इसे आनन्द करे से शोभा सायरे डुबे पुन फिरे या-इते नारये घरे
अर्थ

बालक गौरचन्द्र अपना बिछौना छोड़कर दौड़ते-दौड़ते फिरते हैं। जो भी पास आता है, आनन्द से भर जाता है। वे सब गौरचन्द्र की मनोहर शोभा के सागर में मग्न हो जाते हैं। उनमें अपने घर लौट जाने की शक्ति नहीं रहती।

अति अपरूप प्रीति अनुक्षण उपजे सबार मने ओ राङ्गा चरणे संपे तनु मन दास नरहरि भणे
अर्थ

हर क्षण उनके हृदयों में अद्भुत प्रेम जन्म लेता है। वे अपना हृदय और शरीर बालक गौरचन्द्र के लाल-लाल चरणों में अर्पित कर देते हैं। ऐसा नरहरि कहते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4