आर केनो माया जाले
सुनें
5 रिकॉर्डिंगहे जीव, तू माया के जाल में गिरी हुई मछली के समान क्यों बन गया है? तुझे यह ज्ञान नहीं कि तू बहुत लम्बे समय तक उस जाल में बँधा रहेगा।
अत्यन्त तुच्छ भोग की आशा में तू माया के पाश में बँधा रहता है। तेरा जीवन अस्वाभाविक हो गया है, तू मन ही मन रोगी है। दूसरों पर निर्भर होकर तू बार-बार दण्ड पाता है।
अब भक्ति के बल से तू मुक्त हो जाएगा। कृष्ण-प्रेम के सागर के जल में सहज ही क्रीड़ा करते हुए तू कृष्ण की शरण में रहेगा और उनका सेवक बन जाएगा।
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री, हरे कृष्ण मन्दिर। सभी भक्त गायकों की जय।