Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बाच्य ओ बाचक दुइ स्वरूप तोमार

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बाच्य ओ बाचक दुइ स्वरूप तोमार बाच्य तब श्री-बिग्रह चिद्-आनन्दाकार
अर्थ

हे प्रभु, "वाच्य" और "वाचक" आपके दो स्वरूप हैं। "वाच्य" आपका वह चिदानन्दमय, नित्य दिव्य रूप है।

बाचक स्वरूप तब श्री-कृष्णादि नाम बर्ण-रूपी सर्ब-जीब-आनन्द-बिश्राम
अर्थ

"वाचक" आपके अनेक नामों को कहते हैं, जिनमें श्री कृष्ण नाम सबसे प्रमुख है। विभिन्न अक्षरों से बने ये नाम सभी जीवों को आनन्द और सुख देते हैं।

एइ दुइ स्वरूपे तब अनन्त प्रोकाश दोया कोरि' देय जीबे तोमार बिलास
अर्थ

इन दोनों स्वरूपों को असीम रूपों में प्रकट करते हुए, आप कृपापूर्वक अपनी लीलाएँ जीवों को प्रदान करते हैं।

किन्तु जानियाछि नाथ बाचक-स्वरूप बाच्यापेख दोयामोय एइ अपरूप
अर्थ

फिर भी, हे नाथ, मैं जानता हूँ कि आपका नाम (वाचक-स्वरूप) आपके रूप (वाच्य-स्वरूप) से भी अधिक दयालु है। यह बहुत अद्भुत और सुन्दर है।

नाम नामी भेद नाइ बेदेर बचन तबु नाम नामी हो'ते अधिक कोरुणा
अर्थ

वेदों के वचन कहते हैं कि आपका नाम और आप स्वयं (नामी) भिन्न नहीं हैं। फिर भी, आपका नाम आपके स्वरूप से भी अधिक दयालु है।

कृष्णे अपराधी जदि नामे श्रद्धा कोरि' प्राण भोरि' डाके नाम राम कृष्ण हरि
अर्थ

यदि कृष्ण के प्रति अपराध करने वाला कोई व्यक्ति श्रद्धा से जीवन भर भगवान के नाम, जैसे राम, कृष्ण और हरि, पुकारता रहे,...

अपराध दूरे जाय आनन्द सागरे भासे सेइ अनायासे रसेर पाथारे
अर्थ

...तो उसके अपराध दूर हो जाएँगे। वह सहज ही आनन्द के सागर में, रस के सागर में तैरने लगेगा।

बिग्रह-स्वरूप बाच्ये अपराध कोरि' शुद्ध-नामाश्रोये सेइ अपराध तोरि
अर्थ

जो व्यक्ति भगवान के रूप (वाच्य) के विरुद्ध अपराध करता है, वह भगवान के नाम की शुद्ध शरण लेकर उन अपराधों से पार हो जाता है।

भकतिबिनोद मागे श्री-रूप-चरणे बाचक-स्वरूप नामे रति अनुखणे
अर्थ

श्रील रूप गोस्वामी के चरणों में भक्तिविनोद प्रार्थना करते हैं, "मुझे क्षण-क्षण भगवान के नाम-स्वरूप के प्रति प्रेम प्राप्त हो।"