Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बल्लभ भबने गौर राय

बल्लभ भबने गौर राय बल्लभ मिश्रेर महा आनन्द बाढाय
अर्थ

भगवान् गौर राय वल्लभ आचार्य के घर पहुँचते हैं। अब वल्लभ आचार्य आनन्द से भर उठे हैं।

बल्लभ ह-इय उल्लसित करय मङ्गल कार्य बिबाह-बिहित
अर्थ

अब आनन्दित वल्लभ आचार्य मंगलमय विवाह-संस्कार सम्पन्न करते हैं।

बिश्वम्भर सरस हियाय दाण्डा-इला पिडिर उपरे छोडलाय
अर्थ

सुख के अमृत से भरे हृदय वाले भगवान् विश्वम्भर बरामदे में विवाह-मण्डप के नीचे खड़े हैं।

अङ्गेर भङ्गीते प्राण हरे रूपेर छटाय दश-दिक् आलो करे
अर्थ

उनके अंगों की सुन्दर भंगिमाएँ सबके प्राणों को चुरा लेती हैं। उनके रूप की कान्ति दसों दिशाओं को प्रकाश से भर देती है।

चान्द-मुखे उपमा कि दिते अमिया गरब नाशे ईषत् हासिते
अर्थ

उनके चन्द्र-समान मुख का वर्णन किन उपमाओं से हो सकता है? उनकी मन्द मुस्कान अमृत का गर्व नष्ट कर देती है।

नयन चाहनि चारु छान्दे यार पाने चाय से धैरज नाहि बान्धे
अर्थ

उनकी आँखें सुन्दर ढंग से देखती हैं। जो भी उन्हें देखता है, उनमें से कोई भी शान्त नहीं रह पाता।

मकर कुण्डल श्रुति-मूले चञ्चर केशेर बेशे के बा नाहि भुले
अर्थ

उनके कानों के पास मकर के आकार के कुण्डल सजे हैं। उनके सुन्दर घुँघराले केशों को देखकर कौन अभिभूत नहीं हो जाता?

अङ्गद बलय भाल साजे शोभा देखि कत ना मदन मरे लाजे
अर्थ

वे कंगन और बाजूबन्द से सुन्दर ढंग से सजे हैं। उन्हें देखकर कितने कामदेव लज्जित हो जाते हैं?

एहेन बरेरे उरुथित कन्यार जननी चले आयो-गण साते
अर्थ

वर को आया देखकर कन्या की माता सात दासियों के साथ आती हैं।

से शोभा कहिते कबे पारे सप्त-दीप हते सप्त-प्रदक्षिण करे
अर्थ

भगवान् गौर की उस शोभा का वर्णन करने की शक्ति किसमें है? हाथ में सात दीपक लेकर कन्या की माता भगवान् गौर की सात बार परिक्रमा करती हैं।

परम अद्भुत स्त्री-आचारे बर उरथिया घरे गमन सबार
अर्थ

वे वर के स्वागत की रीति पूरी करती हैं, और सब घर के भीतर जाते हैं।

बल्लभ आचार्य भाग्यबान् आना-इला कन्याय करिते कन्या-दान
अर्थ

भाग्यवान् वल्लभ आचार्य अब विवाह-संस्कार के लिए अपनी पुत्री को लाते हैं।

बसा-इला दिब्य-सिंहासने ह-इल उज्वल महा अङ्गेर किरणे
अर्थ

वल्लभ आचार्य अपनी पुत्री को भव्य सिंहासन पर बिठाते हैं। कन्या का शरीर तेजस्वी है।

अति सु-कोमल तनु-खानि हासि मख बदन पूर्णिमा-चान्द जिनि
अर्थ

उनका शरीर अत्यन्त कोमल और सुकुमार है। उनका मुस्कुराता मुख पूर्णिमा के चन्द्रमा को जीत लेता है।

परिधेय बिचित्र बसन झलमल करे नाना रत्न आभरण
अर्थ

उनके वस्त्र रंग-बिरंगे और अद्भुत हैं। अनेक रत्नों से जड़े उनके आभूषण जगमगा रहे हैं।

हेन कन्या बिबिध बिधाने करिल प्रदान मिश्र शचीर नन्दने
अर्थ

अनेक विधियाँ पूरी करके वल्लभ आचार्य अपनी सुन्दर पुत्री को शची के पुत्र को अर्पित करते हैं।

बिप्र-गणे करे बेद-ध्वनि उलु-लुलु दे-इ यत कुलेर कामिनी
अर्थ

ब्राह्मण वेदों का पाठ करते हैं। कुल की सुन्दर कन्याएँ “उलु-लुलु!” की ध्वनि करती हैं।

बाजे बाद्य बिबिध प्रकार नाचये नर्तक भाट पडे कायबार
अर्थ

अनेक प्रकार से वाद्य बजाए जाते हैं। नर्तक नाचते हैं। भाट कवि कविताएँ सुनाते हैं।

देब-गण बिमाने चडिया बरिषे कुसुम अलखित जय दिया
अर्थ

देवता अपने विमानों से फूल बरसाते हैं। अनदेखे रहकर वे आते हैं और “जय!” कहते हैं।

. भुबन ब्यापिल महा सुखे नरहरि कत न कहिब एक मुखे
अर्थ

सारा संसार महान् सुख से भर गया। इस लीला के कितने ही विवरण नरहरि नहीं बताएगा, नहीं बता पाएगा क्योंकि उसका एक ही मुख है?

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
20