बरणे तडित् बास ताराबली
मेरा वर्ण बिजली जैसा होगा, मेरे वस्त्र तारों के समान होंगे, मेरा नाम कमला-मंजरी होगा, मेरी आयु नित्य साढ़े बारह वर्ष होगी, और मेरा निवास स्वानन्द-सुखद-धाम होगा।
मेरी सेवा कपूर तैयार करना होगी। मैं ललिता के दल में रहूँगी। मेरे दल की स्वामिनी राधा होंगी। मेरी स्वामिनी के नाथ श्री नन्द-कुमार होंगे, वे ही मेरे प्राणों का धन होंगे।
श्री रूप-मंजरी और अन्य मंजरियों की तरह ही मैं दिव्य युगल की सेवा करना चाहती हूँ। पूरे विश्वास के साथ मैं भी उसी तरह उनकी सेवा करूँगी।
यह दासी यह सिद्धि कब प्राप्त करेगी? कब राधा-कुण्ड में निवास करते हुए, अपने पूर्व जन्मों की स्मृति भुलाकर, मैं सदा श्री श्री राधा-कृष्ण की सेवा करूँगी?