Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

भुबन मनो चोरा गोकुल पति गोरा

भुबन-मनो-चोरा गोकुल-पति गोरा चान्देर जनम कि शुभ-क्षणे देखिया पुत्र-मुख शचीर यत सुख ताहा कि कहिबार पारे आने
अर्थ

सब लोकों के मन को चुराने वाले गोकुल के स्वामी भगवान गौर के रूप में आए हैं। उस शुभ क्षण में आकाश के साधारण चन्द्रमा का क्या काम था? पुत्र का मुख देखकर शची आनन्द से भर गईं। उन्होंने जो सुख पाया, उसे कोई और कैसे कह सकता है?

नदीया-पुर-नारी आ-इसे सारि सारि ल-इया थारि भरि द्रब्य बहु सु-सज्जे सुर-प्रिया मानुषे मिशा-इया बालके निरखिया थिर नहु
अर्थ

नदिया-पुर की स्त्रियाँ झुण्ड के झुण्ड उपहारों से भरे थाल लेकर आईं। सुन्दर वस्त्र और आभूषण पहने देवांगनाएँ मानवी स्त्रियों में आकर मिल गईं। नवजात बालक को एक बार देखते ही कोई भी शान्त नहीं रहा।

श्री-सीता-देबी आसि सूतिका-गृहे पशि देखिया शिशु उलसित हिया मालिनी आदि सङ्गे भासाये नाना रङ्गे करय कत ना मङ्गल-क्रिया
अर्थ

श्री सीतादेवी प्रसूति-कक्ष में आईं। शिशु को देखकर उनका हृदय आनन्द से भर गया। मालिनी और अन्य बहुत-सी स्त्रियाँ भी साथ आईं। वे सब आनन्द में तैरती रहीं। उन्होंने कौन-सी मंगल-क्रिया नहीं की?

गोयालिनी बा कत गोयाला शत शत ल-इया दधि आसे चारु साजे सबे बिह्वल-चिते पूर्ब स्वभाबेते छडाय दधि आङ्गिनार माझे
अर्थ

कितनी सारी ग्वालिनें आईं! सैकड़ों-सैकड़ों ग्वाले दही की भेंट लेकर आए। सब सुन्दर वस्त्रों और आभूषणों से सजे थे। उनके हृदय आनन्द से विह्वल थे। उन्होंने घर के आँगन को दही की भेंटों से भर दिया।

रचिया करतालि हासिया नाचे भालि ता देखि देबे गोप-बेश-धारी नाचये आङ्गिनाते के बा ना नाचे ताते सघने जय जय-ध्वनि करि
अर्थ

कुछ करताल बजा रहे थे और कुछ हँस-हँसकर नाच रहे थे। ग्वालों का वेश धरे देवता यह सब देख रहे थे। आँगन में लोग एक-दूसरे को नाचने के लिए उत्साहित कर रहे थे। कौन नहीं नाचा? जोर-जोर से “जय! जय!” की पुकार हो रही थी।

बाजय बाद्य हेन कौतुक नाहि येन मिश्रालये से नन्दालये रीति नरहरि कि कब प्रभु जन्मोत्सब उत्सहे करु किछु नाहि स्मृति
अर्थ

वाद्य बज रहे थे। बड़ा आनन्द था। उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती थी। जगन्नाथ मिश्र का घर महाराज नन्द के भवन जैसा हो गया। नरहरि कहते हैं: क्या भगवान के जन्मोत्सव जैसा कुछ और है? मुझे इसके जैसा कुछ भी नहीं सूझता।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
6