भुबन मनो चोरा गोकुल पति गोरा
सब लोकों के मन को चुराने वाले गोकुल के स्वामी भगवान गौर के रूप में आए हैं। उस शुभ क्षण में आकाश के साधारण चन्द्रमा का क्या काम था? पुत्र का मुख देखकर शची आनन्द से भर गईं। उन्होंने जो सुख पाया, उसे कोई और कैसे कह सकता है?
नदिया-पुर की स्त्रियाँ झुण्ड के झुण्ड उपहारों से भरे थाल लेकर आईं। सुन्दर वस्त्र और आभूषण पहने देवांगनाएँ मानवी स्त्रियों में आकर मिल गईं। नवजात बालक को एक बार देखते ही कोई भी शान्त नहीं रहा।
श्री सीतादेवी प्रसूति-कक्ष में आईं। शिशु को देखकर उनका हृदय आनन्द से भर गया। मालिनी और अन्य बहुत-सी स्त्रियाँ भी साथ आईं। वे सब आनन्द में तैरती रहीं। उन्होंने कौन-सी मंगल-क्रिया नहीं की?
कितनी सारी ग्वालिनें आईं! सैकड़ों-सैकड़ों ग्वाले दही की भेंट लेकर आए। सब सुन्दर वस्त्रों और आभूषणों से सजे थे। उनके हृदय आनन्द से विह्वल थे। उन्होंने घर के आँगन को दही की भेंटों से भर दिया।
कुछ करताल बजा रहे थे और कुछ हँस-हँसकर नाच रहे थे। ग्वालों का वेश धरे देवता यह सब देख रहे थे। आँगन में लोग एक-दूसरे को नाचने के लिए उत्साहित कर रहे थे। कौन नहीं नाचा? जोर-जोर से “जय! जय!” की पुकार हो रही थी।
वाद्य बज रहे थे। बड़ा आनन्द था। उसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती थी। जगन्नाथ मिश्र का घर महाराज नन्द के भवन जैसा हो गया। नरहरि कहते हैं: क्या भगवान के जन्मोत्सव जैसा कुछ और है? मुझे इसके जैसा कुछ भी नहीं सूझता।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- नरहरि दास
- पद
- 6