बृषभानु सुता चरण सेबने
मैं सदा श्रीराधा के चरणों की सेवा करूँगी। मैं एक ऐसी गोपी बनूँगी जिसकी रक्षा सदा वे ही करेंगी। मैं सदा उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करती रहूँगी।
मैं अपने हृदय में यह जान लूँगी कि श्रीराधा के सुख में ही श्रीकृष्ण का सुख निहित है। इसलिए मैं राधा-चरण छोड़कर कभी केवल श्रीकृष्ण के संग रहने की कामना नहीं करूँगी।
श्रीराधा की सखियाँ ही मेरी सबसे बड़ी हितैषी होंगी, जो मुझे दिव्य युगल के प्रेम की शिक्षा देंगी। उनका अनुसरण करते हुए मैं श्रीराधा के चरण-रूपी कल्पतरु की सेवा करूँगी।
मैं सदा श्रीराधा के ही पक्ष में रहूँगी। मैं कभी उनका साथ छोड़कर उनकी प्रतिस्पर्धी सखियों के पक्ष में नहीं रहूँगी, वे चाहे कोई भी हों।