Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौर गोकुल चन्द्र चलु निज गेहे निशि परभात

गौर गोकुल-चन्द्र चलु निज गेहे निशि परभात बिरले बल्लभ स्नेह कहि कत कहल लखिमी कि बात
अर्थ

भगवान् गौर, जो वास्तव में भगवान् कृष्ण हैं, गोकुल में चमकते चन्द्रमा जैसे भगवान् कृष्ण, भोर होते ही अपने घर के लिए चल पड़ते हैं। एकान्त कमरे में वल्लभ आचार्य अपनी पुत्री से स्नेहभरे वचन कहते हैं। अहा, वे लक्ष्मीप्रिया से कैसी बातें कहते हैं!

हेरि पथ यत नारी धैरज ना धर-इ झुर-इ नयान लखिमी सहचरी जाने लखिमीक नाथ करब पयान
अर्थ

नवदम्पती को मार्ग पर चलते देखकर स्त्रियाँ शान्त नहीं रह पातीं। उनकी आँखों से आँसू बहते हैं। लक्ष्मीप्रिया की सखियाँ भली-भाँति जानती हैं कि लक्ष्मीप्रिया और उनके पति शीघ्र ही प्रस्थान करेंगे।

शङ्ख दुन्दुभि भेरी बाजत बाद्य बिबिध प्रकार नटत नर्तक-बृन्द गायत गीत गुणी अनिबार
अर्थ

शंख, दुन्दुभि और भेरी सब बज रहे हैं। अनेक प्रकार के वाद्य बज रहे हैं। नर्तक नाच रहे हैं। गायक बिना रुके महिमामय गीत गा रहे हैं।

बेद उचरत बिप्र-गण गुण बन्दी करु परकाश भुबन भरि जय जय कि नरहरि भबन पहुं बिलास
अर्थ

ब्राह्मण वेदों का उच्चारण करते हैं। भाट कवि नवदम्पती की महिमा का गान करते हैं। “जय! जय!” की ध्वनि लोकों में भर जाती है। इस तरह नरहरि के घर के स्वामी लीला करते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4