Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोराचन्देर बिबाह पर दिने

गोराचन्देर बिबाह पर-दिने कत आनन्द उथले ताय रजनी बिहाने
अर्थ

भगवान् गौरचन्द्र के विवाह के अगले दिन की भोर में घर में कितना आनन्द उमड़ पड़ता है?

कुल-बधू-गण चारि-दिके धाय देखि बर-कन्या-शोभा सबे नयन जुडाय
अर्थ

चारों दिशाओं से साध्वी कन्याएँ दौड़ती हैं। वर और वधू की शोभा को निहारकर उनकी आँखें शीतल आनन्द से भर जाती हैं।

किबा बल्लभ-घरिणी भाग्यबती पा-इया जामाता-रत्न ना जानये आछे कति
अर्थ

वल्लभ आचार्य की भाग्यशाली पत्नी को ऐसा दामाद-रत्न कैसे मिला? वे स्वयं नहीं जानतीं।

मिश्र-बल्लभ उदार अतिशय निज जामाता मङ्गल हेतु किबा न करय
अर्थ

साधु-स्वभाव और उदार वल्लभ आचार्य को ऐसा मंगलमय दामाद कैसे मिला? वे नहीं जानते।

भाले बल्लभ जामाता गौर-हरि हर्षे ह-इलेन बिबाह-बिहित कर्म करि
अर्थ

विवाह-संस्कार पूरा हो जाने पर वल्लभ आचार्य के दामाद बने भगवान् गौर-हरि आनन्दित हुए।

कैल कार्य समाधान सु-बिधाने नरहरि कहे बल्लभ प्रशंसे देब-गणे
अर्थ

अब विवाह का कार्य पूरा हो गया है। नरहरि कहता है: अब सब देवता वल्लभ आचार्य की प्रशंसा करते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
6