नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
गौराङ्ग नहिते तबे कि ह इते
गौराङ्ग नहिते तबे कि ह-इते
केमने धरिते दे
राधार महिमा प्रेम-रस-सीमा
जगते जाना-इते के
मधुर बृन्दा- बिनिप्न माधुरि
प्रबेश चातुरी सार
बरज युबती भाबेर भकति
शकति ह-इते कार
गा-ओ पुनः पुनः गौराङ्गेर गुण
सरल ह-इय मन
ए भब-सागरे एमन दयाल
न देखि ये एक-जन
गौराङ्ग बलिया न गेनु गलिया
केमने धरिनु दे
नरहरि हिया पाषाण दिया
केमन गडियाछे