Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौरसुन्दर परम शुभ क्षणे धरल यज्णोपबीत

गौरसुन्दर परम शुभ-क्षणे धरल यज्णोपबीत बेद बिहित क्रिया-निपुण शची मिश्र निरुपम रीत
अर्थ

अत्यन्त शुभ क्षण में तरुण भगवान् गौरसुन्दर ने यज्ञोपवीत (पवित्र जनेऊ) धारण किया। वैदिक कर्मों में निपुण शची और जगन्नाथ मिश्र ने वह अनुपम संस्कार सम्पन्न किया।

बिबिध मङ्गल कोत कुल बधू उलु-लु-लु-लु-लु-लु देत भाट-गण भण सु-यश शुभ शोभा सु-दिठि भरिलेत
अर्थ

अनेक मंगल-कर्म हुए। साध्वी स्त्रियों ने “उलु-लु-लु-लु-लु-लु!” की मंगल-ध्वनि की। भाट कवियों ने भगवान् गौरसुन्दर की महिमा के सुन्दर कवित्त सुनाए। हर आँख भगवान् गौरसुन्दर की शोभा से भर गई।

गान करु नब-ताल गुणी मरुजादि बायत सु-रङ्ग नृत्य कृत नर्तक उखटि घन धाधि धिकध धिलङ्ग
अर्थ

गायकों ने गाया। मरुज आदि ढोलों पर वादकों ने आनन्द से नौ तालों में बजाया। नर्तकों ने नृत्य किया और उनके पैरों से ध्वनि निकली, “धाधि! धिकध! धिलंग!”

देब-गण-मन-मगन अतिशय निरखि ललित बिलास भुबन भरि जय जय-ध्वनि निछनि नरहरि दास
अर्थ

देवताओं के हृदय आनन्द में मग्न हो गए और वे भगवान् गौरसुन्दर की मनोहर लीलाओं को निहारने लगे। “जय! जय!” की ध्वनि सब लोकों में भर गई। अब नरहरि दास भगवान् गौरसुन्दर की पूजा करता है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4