Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बल्लभ दुहिता लक्ष्मी सु चरिता

बल्लभ-दुहिता लक्ष्मी सु-चरिता सखीते बेष्टित हैया स्नान करिबारे चले गङ्गा तीरे चकित चौदिके चा-इया
अर्थ

अपनी सखियों के साथ और चारों दिशाओं में सावधानी से देखती हुई वल्लभ आचार्य की साध्वी पुत्री लक्ष्मीप्रिया स्नान करने के लिए गंगा के तट की ओर जा रही हैं।

गौराङ्गचान्देरे देखि किछु दूरे उथले निगूढ लेहा से-रूप माधुरी सुधा-पान करि धरिते न रहे थेहा
अर्थ

कुछ दूर पर भगवान् गौरांगचन्द्र को देखकर वे भीतर छिपे प्रेम से भर उठती हैं। उनके रूप की मधुरता का अमृत पीकर वे शान्त नहीं रह पातीं।

गोरा गुण-मणि निज-प्रिया चिनि चाहये लक्ष्मीर पाने जिनि काञ्चा-सोणा लक्ष्मी-तनु जेना प्रबेश मरम थाने
अर्थ

गुणों के रत्नों से भरी हुई अपनी प्रिया लक्ष्मीप्रिया को पहचानकर भगवान् गौर उनकी ओर देखते हैं। लक्ष्मीप्रिया का सुन्दर शरीर शुद्धतम सोने को भी जीत लेता है। भगवान् की वह दृष्टि उनके हृदय में प्रवेश कर जाती है।

दोहे दिठि कोणे मिलि सु-सन्धाने आने ना जानिते पारे नरहरि पहुं हासि लहु लहु आनन्दे चलिल घरे
अर्थ

दोनों एक-दूसरे को आँखों के कोनों से देखते हैं। उन्हें एक-दूसरे के सिवा और कुछ सूझता नहीं। मधुर-मधुर मुस्कुराते हुए नरहरि के स्वामी आनन्द से अपने घर की ओर चल पड़ते हैं।

इस भजन के बारे में

रचयिता
नरहरि दास
पद
4