गोरा अभिषेक कथा अद्भुत कथन
भगवान गौर के अभिषेक का अद्भुत समाचार सुनकर भक्त श्रीवास के घर की ओर दौड़ पड़ते हैं।
दौड़ते हुए वे आनन्द में नाचते हैं। बाँहें उठाकर वे पुकारते हैं, “जय गौरचन्द्र!”
चन्द्रमा नाचता है। सूर्य नाचता है। तारों का समूह नाचता है। ब्रह्मा नाचते हैं। वायु नाचते हैं। हजार आँखों वाले इन्द्र नाचते हैं।
अरुण, वरुण और सब देवता नाचते हैं। पाताललोक में वासुकि नाचते हैं। नाग नाचते हैं।
स्वर्गलोक में सब नाचते हैं। मर्त्यलोक में सब नाचते हैं। पाताललोक में सब नाचते हैं। परम आनन्द में दस दिशाओं के रक्षक दिक्पाल नाचते हैं।
भक्त आनन्द से हुंकार भरते हैं। वासुदेव घोष के हृदय में आनन्द का विशाल, किनारेहीन सागर भर उठता है।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- वासुदेव घोष · जीवनी पढ़ें
- राग
- धानसी राग
- पद
- 6