जय जय ध्वनि उठे नदीया नगरे
नदिया के नगरों में “जय! जय!” की ध्वनि उठ रही है। अब श्रीवास के घर में भगवान गौर का अभिषेक किया जाएगा।
“आओ! आओ!” अद्वैत गोसाईं पुकारते हैं। वे बड़ी हुंकार भरते हैं। उन्हें बाहर की सुध नहीं है।
बाँहें उठाकर नाड़ा (भगवान अद्वैत) उन्मत्त होकर नाचते हैं, और उनके पैरों से “ताधिया! ताधिया!” की ध्वनि उठती है। उनके पीछे-पीछे हरिदास घूम-घूमकर नाचते हैं।
श्रीवास, श्रीपति, श्रीनिधि और श्रीराम आनन्द से भरकर नाचते हैं। उन्हें नाचते देखना आँखों को आनन्द देता है।
“जय गौरांग! जय अद्वैत निताई!” पुकारते हुए भक्त दौड़-दौड़कर उनके पीछे-पीछे आते हैं।
कोई प्रेम के आवेश में नाचता और गाता है। कोई प्रेम के आवेश में हँसता है। वासुदेव घोष भगवान गौर की अभिषेक-लीला का वर्णन करता हुआ यह गीत गाते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- वासुदेव घोष · जीवनी पढ़ें
- पद
- 6