तैल हरिद्रा आर कुङ्कुम कस्तूरी
छोटी-छोटी लड़कियाँ भगवान गौर के अंगों पर तेल, हल्दी, कुंकुम और कस्तूरी का लेप करती हैं।
वे बड़े-बड़े घड़ों को सुगन्धित जल से भरती हैं। वे सुगन्धित चन्दन का लेप लाती हैं।
“जय! जय!” बोलते हुए भक्त भगवान गौर राय को स्नान कराते हैं। कोई महीन तौलिये से उनके शोभामय अंगों को पोंछता है।
प्रसन्न हृदय से स्नान-मण्डप में भगवान गौर राय को देखो! वासुदेव घोष यह गीत गाते हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- वासुदेव घोष · जीवनी पढ़ें
- राग
- बराड़ी राग
- पद
- 4