गोरा नाचे शचीर दुलालिया
शची के प्रिय पुत्र नाच रहे हैं। दूसरे बालक चारों दिशाओं में उन्हें घेरे हुए हैं। ताली बजाते हुए सब “हरिबोल! हरिबोल!” बोल रहे हैं।
उनके गले में सोने का हार है। उनके बाल सुन्दर ढंग से बँधे हैं। शची ने कितने प्रकार से उन्हें वस्त्र पहनाकर सजाया है? उनका सदा तरुण रूप सारे लोकों को मोह लेता है।
वे सोने और चाँदी के अनेक प्रकार के आभूषण पहने हैं। उनका रूप अत्यन्त सुन्दर और लावण्य से भरा है। उनके तलवे लाल कमल के फूलों को हरा देते हैं। चलते समय उनकी पायलें झंकारती हैं।
शची के आँगन में आनन्द से नाचते हुए बालक गौर खेलते हैं। वे अपने मुख से आधे-आधे बोल बोलते हैं। वासुदेव घोष कहते हैं: हे मेरे हाथो, बालक गौर को गले लगा लो, गले लगा लो! बालक गौर ही मेरे प्राणों के स्वामी हैं।
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- वासुदेव घोष · जीवनी पढ़ें
- राग
- बेलोयार राग, दशकोशी
- पद
- 4